उत्कल एसोसिएशन विवाद: 50 वर्षों के बेदाग सार्वजनिक जीवन को ध्यान में रखते हुए एस. के. बेहेरा ने संरक्षक पद से दिया इस्तीफा

 

*एक्जीक्यूटिव कमिटी में पास कराए बिना नए सदस्यों की सदस्यता पर सैद्धांतिक असहमति, बेहेरा ने नियमसंगत और न्यायसंगत चुनाव कराए जाने की प्रतिबद्धता पर बल दिया।*

*तुलना करते हुए भावुक होकर कहा— “यह ऐसा ही है जैसे बच्चे माता-पिता को वृद्धाश्रम भेज देते हैं”*

*सौहार्द्रपूर्ण माहौल और विवाद सुलझने पर इस्तीफा वापस लेने का दिया संकेत*

*आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों की बदहाली पर सरकार का ध्यान खींचा; मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के औद्योगिक प्रयासों की सराहना की*

जमशेदपुर :
उत्कल एसोसिएशन में आगामी 9 तारीख को होने वाले चुनाव और संस्था के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान पर गहरा अफसोस जताते हुए एसोसिएशन के संरक्षक एवं प्रमुख उद्योगपति श्री एस. के. बेहेरा से पत्रकारों ने अपने पद से उनके इस्तीफे पर पत्रकारों के सवालों का जवाब किया।
अपने 50 वर्षों के बेदाग सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए श्री बेहेरा ने कहा कि किसी भी सामाजिक संस्था में टकराव और वैचारिक मतभेद होना संस्था के हित में नहीं है। संस्था की गरिमा और अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए ही उन्होंने स्वयं को इससे अलग रखने का कठिन निर्णय लिया है।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्री बेहेरा अत्यधिक भावुक हो गए। इस्तीफा देने की अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “जिस प्रकार कुछ बच्चे अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम भेज देते हैं, आज मुझे भी इस संस्था में वैसी ही उपेक्षा और आघात का अनुभव हो रहा है।”
विवाद का मुख्य कारण और सुझाव:
श्री बेहेरा ने बताया कि संस्था के एक अभिभावक के रूप में उन्होंने चुनाव को पारदर्शी बनाने हेतु कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, जिन पर शुरुआत में सहमति जताई गई थी। हालांकि, वार्षिक बैठक (AGM) में एकतरफा निर्णय लेते हुए अचानक बनाए गए 109 नए लोगों को तुरंत वोटिंग का अधिकार दे दिया गया, जिससे वे बेहद आहत हैं।
उन्होंने कहा कि नए सदस्यों की सदस्यता का वो स्वागत करते हैं लेकिन बिना एक्जीक्यूटिव कमिटी में पास कराए नए सदस्यों को तत्काल प्रभाव से वोटिंग राइट देना, निष्पक्ष चुनाव को लेकर आशंका पैदा करता है।
उन्होंने समिति के समक्ष स्पष्ट सुझाव रखा था कि:
* इन नए सदस्यों की सही और पारदर्शी जांच (Proper Scrutiny) के लिए चुनाव को 3 महीने के लिए टाल दिया जाए, अथवा
* नए सदस्यों को कम से कम 2 वर्ष के बाद ही चुनाव में मतदान का अधिकार दिया जाए।
कानूनी स्थिति और गतिरोध:
गौरतलब है कि इस पूरी प्रक्रिया और नए सदस्यों की वैधता पर स्थानीय अनुमंडल अधिकारी (SDO) द्वारा पहले ही आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है तथा मामला IG Registration के पास भेजा गया है। इसके अलावा, एसोसिएशन से जुड़े कुछ सदस्यों ने निष्पक्षता की गुहार लगाते हुए माननीय उच्च न्यायालय (High Court) का भी रुख किया है।
इस्तीफा वापसी की उम्मीद:
पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में श्री बेहेरा ने एक सकारात्मक संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी बातचीत और सहमति से इस विवाद का समाधान निकाल लेते हैं तथा संस्था में पुन: सौहार्द्रपूर्ण वातावरण निर्मित होता है, तो वे संस्था के हित में अपना इस्तीफा वापस लेने पर विचार कर सकते हैं।
औद्योगिक विकास और स्वास्थ्य सेवा पर भी हुई चर्चा
अनौपचारिक बातचीत के दौरान श्री बेहेरा ने क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य और अपनी आगामी समाजसेवा पहलों पर भी विचार साझा किए:
* आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया की समस्याएं: उन्होंने आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में जर्जर सड़कों और बुनियादी ढांचे की खराब हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया, ताकि उद्यमियों और श्रमिकों को राहत मिल सके।
* मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना: उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन द्वारा राज्य में उद्योग जगत को बढ़ावा देने और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की खुले दिल से सराहना की।
* पद्मावती देवी मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल: श्री बेहेरा ने अपने महत्वाकांक्षी सामाजिक प्रोजेक्ट ‘पद्मावती देवी मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल’ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह अस्पताल कोल्हान और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को किफायती व अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है, जो जल्द ही जनता की सेवा में समर्पित होगा।

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