सांसद से तनातनी-29
जमशेदपुर, 26 सितंबर: यह सहज विश्वास नहीं होता कि मात्र आठ व्यक्तियों के पास इतनी ताकत आ गई कि कानूनन जियाडा अधिग्रहित और आवंटित भूखंड पर दखल कब्जा न होने पर और सरायकेला खरसावां जिला प्रशासन मूक द्रष्टा बना रहे। अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला के पत्रांक 902दिनांक 3 अगस्त 24 से पता चलता है कि सर्व श्री सारंगी प्रधान , पिता विशेश्वर प्रधान, शिशिर महतो, पिता स्व धनंजय महतो, संतोष महतो, पिता स्व दयानिधि महतो, रोहित प्रधान पिता चिंतामणि प्रधान, मृत्युंजय प्रधान पिता स्व रितराज प्रधान, मंतोष महतो, पिता स्व निरंजन महतो, रोहिन महतो पिता घासीराम महतो और मोहित महतो, पिता स्व चिंतामणि महतो ही मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र के फेज नंबर तीन में वर्गीडीह एवं आसंगी के ग्रामीण हैं जो जमीन दखल में बाधा डालते हैं।
आटो क्लस्टर को भी बना दिया एसिया और लघु उद्योग भारती की तरह जेबी संस्था
यहां होता है इवेंट मैनेजमेंट
(अगले अंक में)
उल्लेखनीय है कि 20 साल पहले टाटानगर इंटरप्राइजेज प्रा. लि. नामक एक कंपनी को जियाडा ने शुल्क लेकर बकायदा आधिकारिक और कानूनन रुप से औद्योगिक प्लांट लगाने के लिये प्लाट संख्या बी 50 एवं 51की लगभग 30 हजार वर्गफीट की जमीन आवंटित की। उस समय जियाडा आयडा था। यह भूखंड आसंगी मौजा के खाता नंबर 45 में पड़ता है। अनुमंडल पदाधिकारी ने इन सबों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष भी मांगा था लेकिन उनका कोई कानूनन पक्ष सत्यापित नहीं हो पाया। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने उक्त कंपनी को कब्जा दिलाने में कठोर रुख नहीं दिखाया और दखल दिलाने के लिये सिर्फ कागजी रश्म अदायगी पूरी की जिसमें न पर्याप्त पुलिस बल दिया गया और न वरीय प्रशासनिक शक्ति वाला दंडाधिकारी।
इसी तरह उद्योग वाले प्लाट की तरह आयडा द्वारा अधिग्रहित जमीन के एवज में आवंटित भूखंड पर कतिपय परिवारों को भी कब्जा नहीं होने दिया जा रहा है। दस्तावेजों में विरोध करने वालों का कोई आधार नहीं। सिर्फ और सिर्फ जिसकी लाठी उसकी भैंस का रवैया प्रदर्शित करते हुए कानून के शासन को धत्ता बताया गया।
इन परिस्थितियों में यह सर्व विदित है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे सफेदपोश माफिया और सांसद की शक्ति काम करती है। सफेदपोश की निगाह उक्त प्लाट पर है जिसपर उसने कब्जा करना भी शुरू कर दिया है। टाटानगर इंटरप्राइजेज प्रा. लि. की ओर से दावा किया जाता है कि उक्त माफिया द्वारा उसे प्लाट पर जाने से हमेशा मना किया गया। जबकि एक सांसद ने कहा कि वो उसे दूसरी जगह प्लाट दिलवा देंगे। फिल्मी अंदाज में यह माफियाई कलाकारी चलती है और प्रशासन खांसो मत नहीं तो नाव डूब जाएगी, का रवैया अख्तियार करते हुए शांति बनाये रखने के नाम पर इस माफियागिरी को बर्दाश्त करता आ रहा है। इस मामले में उद्योग हित की बात करने वाले सभी औद्योगिक संगठन चुप हैं। दो संगठन तो माफिया की जेब में ही है।
जारी….
