Ranchi : आदिवासी छात्र संघ, झारखंड, राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा भारत एवं सरना धर्म सोतो: समिति खूंटी के संयुक्त तत्वावधान में प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता में झारखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं संवैधानिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई. संगठनों ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन, आगामी जनगणना में सरना धर्म कोड के प्रावधान और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की स्थिति को लेकर आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ रहा है.
संगठनों का कहना है कि झारखंड राज्य का गठन आदिवासी समाज के अधिकारों, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ रही है. उनका कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आदिवासी समाज का संवैधानिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है.
प्रमुख मांगें रखी गईं
प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
जनगणना में सरना धर्म के लिए पृथक धर्म कोड लागू किया जाए.
पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के संवैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए.
पेसा (PESA) कानून एवं आदिवासी हितों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए.
अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों एवं राजनीतिक अधिकारों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाए.
तीनों संगठनों ने घोषणा की कि इन मांगों के समर्थन में पूरे झारखंड में चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा. प्रथम चरण में ज्ञापन सौंपा जाएगा, दूसरे चरण में जनजागरण अभियान और प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी और तीसरे चरण में जिला एवं प्रखंड स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा.
संगठनों ने केंद्र एवं राज्य सरकार से आदिवासी समाज की भावनाओं, संवैधानिक अधिकारों और झारखंड की मूल पहचान का सम्मान करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की.
मौके पर आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव, राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा भारत के महासचिव विद्यासागर केरकेट्टा, राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय पाहान, राष्ट्रीय प्रचारीका रेनू उरांव, सरना धर्म सोतो: समिति खूंटी के संरक्षक मथूरा कांडिर, डीएसपीएमयू अध्यक्ष विवेक तिर्की, सचिव अमित टोप्पो सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
