दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां भविष्य में दूसरे ग्रहों पर इंसानों को बसाने की योजना पर काम कर रही हैं. इंसान अंतरिक्ष में पहले ही जा चुका है. लेकिन अंतरिक्ष में या मंगल ग्रह जैसे दूसरे प्लेनेट पर इंसान का रहना बेहद मुश्किल है. अगर भविष्य में किसी इंसान को मंगल ग्रह पर भेजा गया तो वो कैसे जिंदा रहेगा? अगर अंतरिक्ष या दूसरे ग्रह पर इंसान बीमार हुआ तो कैसे इलाज होगा? इस तरह के हैरतअंगेज सवालों का जवाब खोजने के लिए भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन स्पेस में गए हैं. मेनन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर 8 महीने तक रहेंगे और रिसर्च करेंगे. आखिर उनका मिशन क्या है? पूरी बात बताते हैं.
अंतरिक्ष में क्या करेंगे अनिल मेनन?
स्पेस स्टेशन पर अगले 8 महीने के दौरा अनिल मेनन कई वैज्ञानिक प्रयोग और नई तकनीकों का परीक्षण करेंगे, जिनका उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को आसान बनाना और पृथ्वी पर मानव जीवन को बेहतर बनाना है.
सेमीकंडक्टर बनाना: अनिल मेनन अंतरिक्ष में ‘सेमीकंडक्टर क्रिस्टल’ बनाने की रिसर्च को आगे बढ़ाएंगे. इससे सुपर कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक मेडिकल डिवाइसों के लिए बड़े पैमाने पर चिप्स बनाने में मदद मिलेगी.
अंतरिक्ष में करेंगे अल्ट्रासाउंड: वे AR और AI की मदद से अंतरिक्ष में अल्ट्रासाउंड करने का परीक्षण करेंगे. इस तकनीक के सफल होने पर, भविष्य के बड़े अंतरिक्ष अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों को इलाज के लिए पृथ्वी से डॉक्टरों के संपर्क की जरूरत नहीं पड़ेगी. यानी भविष्य में अंतरिक्ष में भी इंसानों का इलाज हो पाएगा.
खुद पर रिसर्च: उनके मिशन में सबसे खास है ‘खुद पर रिसर्च. वे खुद एक ‘टेस्ट सब्जेक्ट’ यानी एक मरीज की तरह बनेंगे, ताकि वैज्ञानिक यह समझ सकें कि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने पर हमारे शरीर में खून का बहाव कैसे प्रभावित होता है. इससे भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.
स्पेस में तेजी से क्यों बूढ़ा होने लगता है इंसान? अनिल मेनन लगाएंगे पता
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण इंसानी शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है. वहां हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और सेल्स तेजी से बूढ़ी होने लगती हैं. पृथ्वी की तुलना में अंतरिक्ष में इंसान तेजी से बूढ़ा होता है. वैज्ञानिकों के लिए यह हमेशा से एक बड़ा रहस्य रहा है कि इस उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को कैसे रोका जाए.
अनिल मेनन खुद एक डॉक्टर हैं. इस मिशन के दौरान वे स्वयं एक ‘टेस्ट सब्जेक्ट’ बनेंगे. वे माइक्रोग्रैविटी में इंसानी नसों की 3D बायो-प्रिंटिंग करेंगे. इससे इंसान के बूढ़े होने की प्रक्रिया को समझने और नई दवाइयां व इलाज खोजने में मदद मिलेगी.
कौन हैं अनिल मेनन?
डॉ अनिल मेनन भारतीय मूल के NASA के अंतरिक्ष यात्री हैं. मेनन के पिता भारत से और मां यूक्रेन से हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण अमेरिका में हुआ. अनिल मेनन इमरजेंसी डॉक्टर और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल हैं. अमेरिकी वायुसेना में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम’ के तहत अफगानिस्तान में अग्रिम मोर्चे पर सेवा दी. इसके अलावा उन्होंने ‘हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन’ के साथ भी काम किया, जहां वह माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों का इलाज करते थे. मेनन भारत में भी एक साल तक ‘रोटरी एंबेसडोरियल स्कॉलर’ के रूप में रहे, जहां उन्होंने पोलियो टीकाकरण अभियान पर स्टडी की.
बता दें कि अनिल मेनन रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से ISS पहुंचे हैं. मेनन के साथ रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी ISS पहुंचे. इस मिशन को लेकर नासा की ओर से कहा गया कि मेनन, डुब्रोव और किकिना अप्रैल 2027 तक ऑर्बिटल लेबोरेटरी में रहेंगे. यह मेनन की अंतरिक्ष की पहली यात्रा है और डुब्रोव, किकिना दोनों के लिए यह दूसरा मिशन है.
