नक्सलवाद पर बड़ा प्रहार: झारखंड में 16 शीर्ष माओवादियों ने हथियारों के साथ किया सरेंडर,11 हथियार और 1562 गोलियां बरामद

 

झारखंड में भाकपा माओवादी के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है. डीजीपी के निर्देश पर

सीआरपीएफ, झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर के नेतृत्व चलाए जा रहे ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत

मंगलवार को झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आधिकारिक तौर पर 16 नक्सलियों ने भारी

मात्रा में हथियारों और कारतूसों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. यह आत्मसमर्पण झारखंड पुलिस,

सीआरपीएफ, कोबरा और झारखंड जगुआर द्वारा चलाए जा रहे चौतरफा संयुक्त अभियानों और झारखंड सरकार की

आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का परिणाम है.
16 नक्सलियों का सरेंडर, 11 हथियार और 1562 गोलियां बरामद

सरेंडर करने वाले 16 नक्सलियों में से ये 14 नक्सली पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और

केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल की उस मारक टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य थे, जिन्हें चाईबासा, कोल्हान

और सारंडा के चप्पे-चप्पे की भौगोलिक जानकारी थी. मिसिर बेसरा के सबसे मजबूत सुरक्षा कवच और ‘ह्यूमन

शील्ड’ कहे जाने वाले इस दस्ते के हथियार डालते ही अब माओवादी शीर्ष नेतृत्व जंगलों में पूरी तरह से

अकेला, अलग-थलग और बेबस पड़ गया है. इन नक्सलियों के पास से 11 हथियार और 1562 गोलियां बरामद

हुई हैं.

झारखंड में माओवाद के खात्मे की यह पटकथा केवल एक दिन में नहीं लिखी गई, बल्कि पिछले दो महीनों में

सुरक्षा बलों के “ट्रिपल स्ट्राइक” (गिरफ्तारी, मुठभेड़ और सरेंडर) ने संगठन के समूचे ढांचे को भीतर से

खोखला कर दिया है. सरकारी आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करें तो मई 2026 से लेकर अब तक का समय

झारखंड पुलिस के इतिहास का सबसे सफल नक्सल विरोधी काल साबित हुआ है. 21 मई 2026 को 27 बड़े

नक्सल कमांडरों के सामूहिक सरेंडर के बाद माओवादियों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब 13 जुलाई को 20

लाख का इनामी शीर्ष कमांडर रवींद्र गंझू दबोचा गया और ठीक चार दिन बाद 17 जुलाई को 25 लाख का

इनामी स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य (सैक) अजय महतो उर्फ टाइगर पुलिस की गिरफ्त में आया.

 

इसके तुरंत बाद महिला कमांडर बबिता उर्फ अनीता किस्कू के सरेंडर और साल 2026 में अब तक 93

नक्सलियों की गिरफ्तारी, 45 के सरेंडर और मुठभेड़ में 22 के मारे जाने के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है

कि राज्य में माओवादी विचार और नेटवर्क दोनों अपनी अंतिम सांसे ले रहे हैं.
इन छह महिला नक्सली समेत 16 नक्सलियों ने किया समर्पण

गिरिडीह का रहने वाला 15 लाख रुपये का इनामी संतोष उर्फ वासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय

महतो उर्फ वासुदेव उर्फ श्याम: 128 कांड में शामिल है.
हजारीबाग का रहने वाला संतोष मांझी उर्फ जगबंधु: 32 कांडों में शामिल रहा है.
खूंटी का रहने वाला दस लाख रुपये का इनामी चंदन लोहरा: 78 घटनाओं में शामिल रहा है.
ओडिशा का रहने वाल जयकांत मुंडा उर्फ बंगाली: 38 घटनाओं में शामिल है.
चाईबासा का रहने वाला राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा: छह कांडों में शामिल रहा है.
लोहरदगा का रहने वाला पांच लाख रुपया का इनामी अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल: 22 कांडों में शामिल रहा

है.
लातेहार का रहने वाला पांच लाख रुपया का इनामी सुखलाल बिरजिया उर्फ अकेला: 12 कांडों में शामिल

रहा है.
चाईबासा का रहने वाला दो लाख का इनामी सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम होनहागा उर्फ सोना: 33 कांडों में

शामिल रहा है.
गिरिडीह की रहने वाली एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत उर्फ शनिचरवा: नौ कांडों में शामिल रही है.
गिरिडीह का रहने वाला देवान मुर्मू उर्फ शनिचर: छह कांडों में शामिल रहा है.
चाईबासा का रहने वाली सुमित्रा सुरीन: 15 कांडों में शामिल रही है.
बोकारो की रहने वाली चंपा मंझियाईन उर्फ गुड़िया: पांच कांडों में शामिल रही है.
चाईबासा का रहने वाला दो लाख रुपये की इनामी रिसिव: 18 कांडों में शामिल रहा है.
रांची की रहने वाली सालमी मुण्डा उर्फ पारूल: छह कांडों में शामिल रही है.
चाईबासा की रहने वाली मुन्नी सुरीन उर्फ मुरीन सुरीन: 14 कांडों में शामिल रही है.
सरायकेला की रहने वाली सीता मुण्डा: तीन कांडों में शामिल रही है.

Share this News...