*धनबाद क्रिकेट संघ को पारिवारिक लड़ाई की भेंट चढाने का कुत्सित प्रयास* *एक नेता कर रहे संघ को दो फाड़ करने की नाकाम कोशिश, विवादित रहे पुलिस अधिकारी चल रहे शकुनी की चाल*

 विवादित रहे पुलिस अधिकारी चल रहे शकुनी की चाल ,सिंह मेंशन बनाम रघुकुल विवाद में फंसा डी सी ए*
धनबाद ,19 जुलाई।
धनबाद क्रिकेट संघ *(डीसीए)* की प्रतिष्ठा और उसके गौरवशाली इतिहास को पारिवारिक लड़ाई एवं शकुनी चाल की भेंट चढ़ाने की कोशिशें हो रही है । खेल प्रेमियों को इससे निराशा हो रही। आम लोग यह सोचने को विवश हो रहे कि नेताजी ने एक चुनाव क्या जीता जेल में बिताए दिनों को भूल गए जब सबकी सहानुभूति उनके साथ हो गयी थी। उल्लेखनीय है कि डी सी ए के एक पदाधिकारी स्व राजन सिंह और स्व नीरज सिंह के संबंधी हैं जो स्व सूर्योदय सिंह के भी उतने ही प्रिय रहे। कालांतर में सूर्यदेव सिंह के परिवार में आपसी कलह पैदा हुई । लेकिन इसमें डी सी ए पदाधिकारी पूर्ववत दोनों से संबंध बनाए हुए मध्य मार्ग में बने रहे । पता नहीं क्या कारण हुआ कि आज वह नेता जी की आंखों के किरकिरी हो गए हैं और उन्हें डी सी ए में नीचा दिखाने के लिए नेताजी अपने परिवार की तरह एक प्रतिष्ठित संघ का ही सत्यानाश करने पर उसी तरह तुल गए हैं जिस तरह सिंह मेंशन और रघुकुल के बीच विवाद चर्चे में रहता है।चर्चा है कि इसी निजी संबंधों और पारिवारिक विवाद को क्रिकेट प्रशासन में घसीटकर डीसीए की साख को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हो रहा है जिसे शकुनी मामा टाइप के लोग हवा दे रहे। इस मामा ने जगदीश राज जैसे आई पी एस को कहीं का नहीं छोड़ा। तत्कालीन उपायुक्त स्व मदन मोहन झा के माफिया उन्मूलन अभियान में यह पुलिस पदाधिकारी प्रशासन का इनफॉर्मर बना रहा और आज सिंह परिवार का सिपहसलार बन गया है। उल्लेखनीय है धनबाद क्रिकेट संघ में अपनी पैठ बनाने के लिए ही पूर्व चर्चित पुलिस अधिकारी जो डीसीए से जुड़े हुए हैं, के माध्यम से वर्तमान विवाद पैदा किया जा रहा है जिसे हाल ही एक चुनाव जीते उक्त नेताजी हवा दे रहे हैं। विदित हो अवधेश कुमार सिंह की ओर से डीसीए की विशेष आमसभा बुलाने की मांग करते हुए एक पत्र भेजा गया था। शनिवार को हुई डीसीए की प्रबंध समिति की बैठक में इस पत्र पर विचार किया गया। समिति ने पत्र को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसमें कई सदस्यों के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए, जबकि कुछ हस्ताक्षर ऐसे लोगों के थे जो डीसीए के सदस्य ही नहीं हैं।
डीसीए अध्यक्ष मनोज कुमार के अनुसार, 26 जून को हुई प्रबंध समिति की बैठक में भी इस पत्र की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने बताया कि पत्र जमा करने के तीन दिन बाद स्वयं अवधेश कुमार सिंह ने ईमेल के माध्यम से स्वीकार किया कि उसमें दस सदस्यों के हस्ताक्षर वैध नहीं थे। बाद की जांच में कई सदस्यों ने अपने हस्ताक्षर फर्जी होने की बात कही, जबकि कुछ क्लबों के प्रतिनिधियों के नाम पर किए गए हस्ताक्षर संबंधित क्लबों की ओर से अधिकृत भी नहीं थे।
डीसीए के भीतर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि अवधेश कुमार सिंह अपने पुलिस सेवा काल में भी विवादित कार्यशैली के लिए कुख्यात रहे हैं। धनबाद के तत्कालीन आरक्षी अधीक्षक जगदीश राज के पत्रकारों से विवाद से संबंध खराब करने में अवधेश सिंह ने बड़ी भूमिका निभाई थी। वे बैंक मोड़ के थानेदार रह चुके हैं । वे दारू के कारोबार में भी नौकरी के समय ही शामिल रहते थे। करीब साढे तीन दशक बीतने के बाद भी अवधेश सिंह उसी मनोवृति के शिकार हैं और आज भी संगठन में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
*गौरवशाली रहा है डीसीए का इतिहास*

धनबाद क्रिकेट संघ का इतिहास बेहद गौरवपूर्ण रहा है। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के दौर में जमशेदपुर के बाद धनबाद क्रिकेट की सबसे मजबूत इकाइयों में गिना जाता था। सबा करीम, अविनाश कुमार और रॉबिन मुखर्जी जैसे खिलाड़ियों ने धनबाद का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। वर्तमान में भी डीसीए उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है और भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके शाहबाज नदीम इसी संघ की देन हैं जो आज झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोशिएशन से जुड़े हैं।
ऐसे में यह आवश्यक है कि क्रिकेट जैसे खेल को व्यक्तिगत लड़ाइयों और राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रखा जाए।
धनबाद क्रिकेट संघ की गरिमा, पारदर्शिता और खेल भावना को बनाए रखना सभी पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है। व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर यदि क्रिकेट और खिलाडय़िों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, तभी डीसीए अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा सकेगा।
बैठक में अहम फैसले
शनिवार को हुई डीसीए की बैठक में कई और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इसमें धनबाद में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन देने और महिला क्रिकेटरों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला समिति का गठन किया गया। समिति की अध्यक्ष डीपीएस की प्राचार्य डा. सरिता सिन्हा को बनाया गया जबकि पूनम शर्मा, आशनी सिंह, डा. नीतू सहाय, सोनाली सिंह, सुप्रिया कुमारी, कल्याणी सिन्हा, डा. रीना बर्णवाल और बिंदु सिंह को इसका सदस्य मनोनीत किया गया।आशिनी सिंह रघुकुल परिवार से आती है.
बैठक में कार्यकारिणी सदस्य संतोष कुमार सिंह एवं दिवेन तिवारी के आचरण एवं एसोसिएशन की गतिविधियों के प्रति उनके असहयोगात्मक रवैये को लेकर चर्चा की गई। प्रबंध समिति का मत था कि उनके व्यवहार से ऐसा लग रहा था कि उनका उस समिति पर विश्वास ही नहीं है, जिसके वे सदस्य हैं। इससे लगता है कि वे कार्यकारिणी सदस्य के रूप में कार्य करने के इच्छुक नहीं हैं और ऐसा माना जाता है कि उन्होंने अपना पद त्याग दिया है। उनके स्थान पर अशोक सराफ और शिव शक्ति को तत्काल प्रभाव से कार्यकारिणी सदस्य नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा अभिषेक सिंह को भी कार्यकारिणी सदस्य नियुक्त करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। अभिषेक सिंह स्व नीरज सिंह के अनुज हैं जो रघुकुल से आते हैं। उक्त नेताजी सिंह मेंशन से जुड़े हैं। इस प्रकार डी सी ए सिंह मेंशन बनाम रघुकुल विवाद में फंस गया है।

अभिषेक को लेकर विवाद

अभिषेक सिंह को कार्यकारी सदस्य बनाए जाने पर विवाद हो रहा है कहा जा रहा है कि कार्यकारिणी सदस्य चुनकर आते हैं मनोनीत नहीं किया जा सकते मगर इस परिवार के सदस्य को कार्यकारिणी में मनोनीत कर शामिल कर लिया गया है.

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