आदित्यपुर19 सितंबर । आरआईटी थाना क्षेत्र में आसंगी मौजा अंतर्गत बर्गीडीह गांव के कुछ युवक कानून के राज को खुली चुनौती देते हुए सरकारी संस्थाओं को ठेगा दिखाते हैं। कल इस गांव में कुछ इसी तरह का वायका हुआ जब जियाडा द्वारा आवंटित भूखंड पर कब्जा लेने गये लोगों को खदेड़ दिया गया और चहारदिवारी को तोडफ़ोडक़र ढाह दिया गया।
संजय कुमार वर्मा , प्रमोद साहू, उमा प्रसाद वर्मा, विनोद कुमार साहू, अशोक कुमार वर्मा एवं अजय निशान ने आज इस मामले में अपना दुखड़ा एक ज्ञापन के माध्यम से उपायुक्त सरायकेला, एसपी और एसडीओ के साथ साथ जियाडा के संयुक्त निदेशक को भी सौंपा। इनका कहना है कि हम आसंगी मौजा के रैयतदार हैँ। अपने भूखंड में तीन दिनों से चहारदिवारी का निर्माण करा रहे थे। यह जमीन उन्हें जियाडा द्वारा उनकी अधिग्रहित जमीन के एवज में आवंटित की गई। जियाडा ने उद्योग लगवाने के लिये उनकी जमीन का अधिग्रहण किया है। उनका दावा है कि गत 26 मार्च 2015 को जियाडा द्वारा भू वापसी परवाना संख्या 86 के मार्फत सीमांकन करके सौंपा गया है। दतनुसार वे उस जमीन पर चहारदिवारी का निर्माण करा रहे थे। लेकिन रोहित प्रधान, पुत्र चिंतामणी प्रधान, संतोष महतो पुत्र रामधन महतो, मंतोष महतो पुत्र निरंजन महतो, शिशिर महतो पुत्र खेपा महतो, सुमित प्रधान पुत्र सारंगी प्रधान अज्ञात 15 -20 लोगों को लेकर वहां पहुंचे और मारपीट धक्का मुक्की करते हुए बलपुर्वक निर्माणाधीन चहारदिवारी को ध्वस्त कर दिया। इन लोगों ने धमकी दी कि ये जमीन चाहे जिसने भी आवंटित की हो, चहारदिवारी का निर्माण नहीं होने देंगे। विदित हो कि इस भूखंड पर पहले चहारदिवारी थी जो सरस्वती मेला में टूट गई थी। इसके लिये मेला कमिटी द्वारा उसका पुननिर्माण कराया गया। कमिटी ने आरआईटी थाना में लिखित दिया है कि चहारदिवारी उनके टूटी जिसके लिये उन्होंने रैयतदार से माफी भी मांगी है और दावा किया है कि उक्त भूखंड के स्वामी उपर्युक्त रैयतदार ही हैं। इसके बावजूद कल इस तरह खुलेआम चहारदिवारी के निर्माण कार्य को ढाह देना ट्रेस पासिंग ही नहीं, किसी की निजी संपत्ति को लूटना भी है। पुलिस ने इस मामले में उक्त आरोपियों के विरुद्ध न्याय संहिता की किन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया, ज्ञात नहीं हो पाया है। ज्ञापन सौंपने वाले रैयतदारों का दावा है कि तोडफ़ोड़ करने वाले लोगों में आपराधिक आचरण के भी लोग हैं जो जेल भी जा चुके हैं। मंतोष महतो के बारे में कहा जाता है कि वह टाटा स्टील में काम भी करते हैं। कल किन परिस्थितियों में वे वहां गये, पता नहीं चला। बताया जाता है कि एक सांसद के बल पर ही ये लोग इस तरह खुलेआम आतंक फैलाते हैं। प्रशासन विधि व्यवस्था का संकट पैदा न हो, इसके लिये हाथ पर हाथ धरे बैठे चुपचाप कानून व्यवस्था के साथ
दुराचार होते देखता रहता है।जियाडा ने जब किसी को प्लाट आवंटित कर दिया तो उसे इस तरह सरेआम चुनौती देने वाला कोई दल कैसे हो सकता है? और प्रशासन चुपचाप तमाशा कैसे देख सकता है? क्या पुलिस और प्रशासन की सख्ती से बड़ी शक्ति इन अपराधियों के पास है?
