मार्मिक अपील : ‘पैसा दिला दीजिए, नहीं तो मर जाएंगे’, पांच माह से मानदेय नहीं मिलने पर अस्पताल में बिलख पड़ी बोड़ाम की आदिवासी महिला होमगार्ड

 

जमशेदपुर, 18 जुलाई (रिपोर्टर) : एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शनिवार सुबह एक बेहद मार्मिक और चिंताजनक घटना सामने आई. अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात बोड़ाम की रहनेवाली महिला होमगार्ड फूलकुमारी अचानक फूट-फूटकर रोने लगीं. पिछले करीब पांच महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने और गंभीर आर्थिक तंगी के कारण वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी है. जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब नौ बजे उन्हें यह जानकारी मिली कि अगले सप्ताह भी बकाया मानदेय मिलने की संभावना नहीं है. यह सुनते ही उनका धैर्य जवाब दे गया और अस्पताल परिसर में ही वह बिलख-बिलखकर रोने लगीं और बार-बार कहने लगीं ‘हमको पैसा दिला दीजिए, नहीं तो हम मर जाएंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि यदि जल्द मानदेय नहीं मिला तो वह अस्पताल की छत से कूदकर अपनी जान दे देंगी.
महिला होमगार्ड की यह बात सुनते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई. मौके पर मौजूद अस्पताल कर्मियों और अन्य होमगार्ड जवानों ने तत्काल उन्हें संभाला, समझाया और अस्पताल के पूछताछ केंद्र में बैठाकर काफी देर तक उनका मनोबल बढ़ाया. इस दौरान कई साथी जवान भी भावुक हो गए. फूलकुमारी ने बताया कि वह लगभग छह महीनों से रीढ़ की हड्डी में असहनीय दर्द से पीडि़त हैं. उन्होंने एमजीएम अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन कोई विशेष राहत नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित एक चिकित्सक से इलाज शुरू कराया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी, लेकिन लगातार मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके पास ऑपरेशन कराने तक के पैसे नहीं हैं.

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले भी एमजीएम अस्पताल में ड्यूटी कर रही एक अन्य महिला होमगार्ड ने लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने और मानसिक तनाव के कारण फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि बकाया मानदेय के कारण कई होमगार्ड जवान आर्थिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकट से गुजर रहे हैं.

समय पर भुगतान की उठी मांग
होमगार्ड जवानों का कहना है कि नियमित रूप से ड्यूटी करने के बावजूद महीनों तक मानदेय नहीं मिलने से उनके परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है. कई जवान इलाज, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में समय पर मानदेय का भुगतान नहीं होना उनके लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है. एमजीएम अस्पताल में शनिवार को हुई यह घटना न केवल एक महिला होमगार्ड की पीड़ा को सामने लाती है, बल्कि उन सभी होमगार्ड जवानों की बदहाल स्थिति को भी उजागर करती है, जो महीनों से अपने मेहनताने का इंतजार कर रहे हैं.

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