चिलचिलाती धूप में वाटर पार्क फेल: स्विमिंग पूल का खर्च नहीं उठा सकते, तो स्वर्णरेखा नदी को ही बना लिया ‘नेचुरल वाटर पार्क

 

सूरज भगवान इन दिनों पूरी तरह से आग उगल रहे हैं। पारा 38°C से 40°C के पार पहुँच चुका है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह त्रस्त है। इस झुलसा देने वाली गर्मी से बचने के लिए कोई कूलर के सामने दुबका है, तो कोई एयर कंडीशनर (AC) का सहारा ले रहा है।

लेकिन इसी जमशेदपुर में एक ऐसा तबका भी है, जिसने इस भीषण तपिश से बचने के लिए एक ऐसा अनोखा और देसी तरीका निकाला है, जिसे देखकर बड़े-बड़े रईस भी दंग रह जाएं।

अमीरों के लिए वाटर पार्क, गरीबों के लिए स्वर्णरेखा नदी– आज के दौर में गर्मी से राहत पाने के लिए संपन्न लोग स्विमिंग पूल या वाटर पार्क का रुख करते हैं, जहाँ एक व्यक्ति का टिकट ₹500 से लेकर ₹2000 तक होता है। लेकिन शहर का एक बड़ा तबका ऐसा है जिसके लिए यह खर्च उठा पाना नामुमकिन है। ऐसे में इन लोगों के लिए लाइफलाइन बनी है—स्वर्णरेखा नदी के ठंडे पानी में डुबकी लगा रहे स्थानीय लोगों से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने अपना दर्द और इस देसी जुगाड़ के पीछे की वजह साझा की।
शैलानी–
हम लोग महीने का बमुश्किल 8 से 10 हजार रुपये कमाते हैं। हमारे परिवार में चार लोग हैं। अगर हम किसी वाटर पार्क में जाते हैं, तो ₹1000 प्रति व्यक्ति के हिसाब से ₹4000 तो सिर्फ टिकट में ही चले जाएंगे। आधे महीने की कमाई सिर्फ एक दिन के शौक में उड़ा देना हमारे लिए मुमकिन नहीं है।
स्थानीय निवासी–
बिना एक भी रुपया खर्च किए मिल रहा वाटर पार्क का मजा– नदी में नहा रहे लोगों का कहना है कि स्वर्णरेखा नदी उनके लिए किसी प्राकृतिक वाटर पार्क से कम नहीं है। यहाँ न तो कोई टिकट का झंझट है और न ही जेब खाली होने का डर। सुबह से ही नदी के घाटों पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भारी भीड़ उमड़ रही है। लोग घंटों पानी में रहकर गर्मी को मात दे रहे हैं।

यह नजारा इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब साधन सीमित हों, तो इंसान कुदरत की गोद में ही अपनी खुशियाँ और राहत तलाश लेता है।

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