कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की तरफ से आज राज्यसभा में दिए बयान पर जमकर हंगामा हुआ है. उन्होंने अपने भाषण में मनुस्मृति का जिक्र कर दिया. इस पर सरकार की तरफ से जेपी नड्डा ने समाज को बांटने वाला बयान बताया. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मनस्मृति में ऐसी कोई बात लिखी ही नहीं है.
‘2024 में ही क्यों नहीं किया?’
खरगे ने अपने भाषण की शुरुआत शेर-ओ-शायरी से करते हुए कहा, “पेपर चुराने वाले बचते रहे, मेहतन करने वाले पीटते रहे, ये कैसा न्याय, ये कैसी रीत, गुनहगार हंसते रहे, मासूम सिसकते रहे. मैं ये इसलिए कह रहा हूं कि, पेपर लीक की वजह से कितने बेगुनाह लोगों को नुकसान हुआ, कितने लोगों की पिटाई हुई, कितने माता-पिता परेशान हुए, कितनी महिलाएं और बच्चे परेशान हुए. आपने चर्चा के लिए आए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026’ में सिर्फ़ आंकड़े बदले हैं. इस बिल में बस आंकड़े ही बदलते रहे. इससे कुछ नहीं होने वाला. आपने ज्यादा जुर्माना, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स, फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान शामिल किए हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. फर्क इस बात से पड़ेगा कि आप यह परीक्षा कैसे आयोजित करते हैं और बिना पेपर लीक के कैसे तैयारी करते हैं, यह उस पर निर्भर करता है… ऐसा कड़ा कानून लाने की मांग हमने 2024 में ही की थी. लेकिन तब आपने हमारी बात नहीं मानी और आपने अपने भाषण में कहा कि आप लोग सहमत नहीं थे. लेकिन हम बार-बार आपसे यह कड़ा कानून बनाने के लिए कहते रहे. पर आपने ऐसा नहीं किया. जो काम आप दो साल बाद कर रहे हैं, उसे आपने 2024 में ही क्यों नहीं किया?…इसीलिए आंदोलन हुआ.”
मल्लिकार्जुन खरगे का विवादित बयान
राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने आगे कहा, “आप उस आंदोलन को संभाल नहीं सके. 100 से अधिक छात्र इस आंदोलन में घायल हुए. वेंटीलेटर पर कई हैं. कई बच्चों को पैलट गन के छर्रे लगे. ये देखकर हमें शर्म आई, उन्हें आई कि नहीं मुझे पता नहीं. केंद्र और राज्य की कम से कम 152 परीक्षाएं लीक हुईं. अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं आप और आप अपना कल्चर बदलना चाहते होऔर आप अपने देश का भविष्य बदलना चाहते हो. कहां है विकास. आप पाठ्यक्रम बदल रहे हैं. हर विश्वविद्यालय में आरएसएस के लोग भर्ती कर रहे हैं. सरकार की नीतियां बार-बार उस मनुवादी सोच की याद दिलाती हैं, जिसका उल्लेख मनुस्मृति में मिलता है और संस्कृत तो मैं ठीक ढंग से पढ़ नहीं सकता लेकिन उसका ट्रांसलेशन मैं बताता हूं. फिर मनुस्मृति दिखाते हुए बोले, “इसमें लिखा है शूद्र के वेदपाठ सुनने पर शीशे और जस्ते से उनके कान भर दिए जाएं. वेद के अक्षर का उच्चारण करने पर उसकी जीभ काट ली जाए तथा वेद मंत्र धारण करने पर उसका शरीर काट डालना चाहिए. ”
जेपी नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी का जवाब
इस पर सत्ता पक्ष के सदस्य खड़े हो गए. राजसभा के उपसभापति ने तब पूछा कि क्या खरगे जी इस बिल का मनुस्मृति से कोई लेना-देना है? खरगे ने कोई जवाब नहीं दिया और अपना भाषण यूपीए सरकार की तारीफ से समाप्त किया. लीडर ऑफ हाउस जेपी नड्डा ने कहा, ‘जो वक्तव्य विपक्ष के नेता खरगे जी ने दिया है उस वक्तव्य से समाज में एक विद्वेश की भावना पैदा होती है और अशांति का वातावरण पैदा होता है. हम सब जिम्मेदार सदस्य हैं. मेरा निवेदन है कि जो उन्होंने कहा है और जहां तक मेरी जानकारी है, वो तथ्यों से परे है और मनुस्मृति का ओरिजनल टेक्स्ट उसको प्रमाणित करे. ये ओरिजनल टेक्स्ट नहीं है. मैं निवेदन करूंगा कि इस पर प्रकाश डालने के लिए बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी दो मिनट बोलें.’ सुधांशु त्रिवेदी ने तब कहा, ‘सर माननीय नेता प्रतिपक्ष ने जो विषय रखा है, मैं बताना चाहता कि विलियम जोन्स जो कलकत्ता हाईकोर्ट के जज थे, उन्होंने मनस्मृति का ट्रांसलेशन किया. बाबा साहब आंबेडकर ने भी अपनी किताब में भी जिक्र किया है कि वेदों में भेद-भाव नहीं है.’
