EC ने अहम बैठक की, फिर “अंदरूनी मतभेद” की खबरों पर सफाई दी, SIR समेत सभी अहम फैसले पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे

नई दिल्ली:

चुनाव आयोग ने शनिवार को आयोग के भीतर अंदरूनी मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए अपने कामकाज पर लगे आरोपों पर बिंदुवार सफाई दी. आयोग ने जोर देकर कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) समेत सभी अहम फैसले पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी व सुखबीर सिंह संधू ने एकजुटता दिखाते हुए अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार को इन मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक की. इसके बाद आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि घोषित फैसलों को पूरे आयोग की मंजूरी मिली हुई थी.

यह सफाई तीन सदस्यीय पैनल के कामकाज को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद और विपक्षी दलों द्वारा कुमार को हटाने की मांग के बीच आई है.
क्या है विवाद और जवाब क्या मिला

यह विवाद ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उन खबरों के बाद शुरू हुआ, जिनमें जोशी और संधू द्वारा कई मुद्दों पर आपत्ति जताने की बात कही गई थी. इन मुद्दों में फॉर्म 6 में बदलाव, ECINET का कामकाज, IT डिवीजन में काम का बंटवारा, पश्चिम बंगाल में अपील और गोवा में वोटरों से जुड़े मामलों को संभालना शामिल था.
फॉर्म 6 के मुद्दे पर, SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म के साथ लगे घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) को लेकर सवाल उठाए गए थे. आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस घोषणा-पत्र को सही ठहराया है. आयोग ने यह भी कहा कि SIR अवधि के बाहर, ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के तहत निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा.

ECINET के मामले में, वोटर लिस्ट डेटाबेस तक पहुंच और पोर्टल के कामकाज को लेकर चिंताएं जताई गई थीं. आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनकी कानूनी शक्तियों के अनुसार ‘रोल-बेस्ड एक्सेस’ (भूमिका-आधारित पहुंच) दिया गया है. आयोग ने एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा ECINET की समीक्षा करने की भी घोषणा की; इस समिति में IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा.
आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को अगर और छूट की जरूरत होगी, तो उसे लागू किया जाएगा. उसने यह भी तय किया कि IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी सभी नई पहलों पर, आयोग के सामने मंजूरी के लिए रखने से पहले अधिकारियों की समिति चर्चा करेगी.
एक और मुद्दा कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए उस पत्र से जुड़ा था, जिसमें ECI में डेप्युटेशन पर आए एक अधिकारी के काम के बंटवारे का ज़िक्र था. आयोग ने कहा कि यह पत्र आयोग या उसके IT डिवीज़न की किसी पॉलिसी से नहीं, बल्कि उस अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था. उसने कहा कि दो कमिश्नरों के निर्देशों के बाद भी काम के बंटवारे के आदेश लागू नहीं किए गए और डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर से IT डिवीज़न की देखरेख का अधिकार कभी वापस नहीं लिया गया.

SIR पर चुनाव आयोग का जवाब

SIR पर आयोग ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया को शुरू करने का 24 जून, 2025 का आदेश आयोग की सर्वसम्मति से जारी किया गया था. उसने कहा कि बाद के शेड्यूल भी सर्वसम्मति से जारी किए गए थे और बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मूल SIR आदेश को सही ठहराया था.
आयोग ने गोवा में उन 97 वोटरों के मामले पर भी बात की, जिनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए थे. उसने कहा कि गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बूथ लेवल अधिकारियों को घर-घर जाकर उनके फ़ॉर्म इकट्ठा करने का निर्देश दिया था. 97 वोटरों में से 81 ने नाम शामिल करवाने के लिए पहले ही फ़ॉर्म 6 भर दिया था.
आयोग ने अपने अंदरूनी कामकाज को बेहतर बनाने के लिए भी कई उपाय बताए. अब आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले ही भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही का ब्यौरा (मिनट्स) जारी किया जाएगा. उसने कहा कि कमिश्नरों की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पूरी सख्ती से पालन किया जाएगा.
आयोग ने दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 अक्टूबर तक और उनके निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर तक बढ़ा दी. महाराष्ट्र में, इसके लिए समय-सीमा क्रमशः 12 अक्टूबर और 10 नवंबर तक बढ़ाई गई.

हालांकि, यह विवाद अब अंदरूनी प्रक्रिया के सवालों से आगे बढ़ चुका है. विपक्षी दलों ने जोशी और संधू की कथित आपत्तियों का हवाला देते हुए आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं और कुमार को हटाने की मांग की है. यह विवाद SIR को लेकर चल रही बड़ी राजनीतिक लड़ाई से भी गहराई से जुड़ गया है, जिसमें विपक्षी दल चुनाव आयोग से ज़्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. आयोग के ताज़ा बयान में आंतरिक विचार-विमर्श और औपचारिक फ़ैसलों के बीच फ़र्क बताने की कोशिश की गई है. इसमें कहा गया है कि SIR समेत उसके अहम फ़ैसले सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए गए थे.

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