सांसद से तनातनी -5 इस सफेदपोश का अनीति से परहेज नहीं और नीति से नाता नहीं ,20-25 करोड़ की धोखाधड़ी में जुगसलाई से बोकारो तक के लोग शिकार

 

राशन दुकान, आटा चक्की , बाद में इंडस्ट्रियल इलाके से निकलने वाले स्क्रैप के कारोबार से लगभग 20 -25 वर्षों में आदित्यपुर में स्वराज पाल की तरह लोहा साम्राज्य कायम करना साधारण बात नहीं, लेकिन स्वराज पाल पर गांव के पैसों का न हिसाब बाकी रहा और न ही उनके द्वारा किसी संघ की शक्ति को निजी हित में सिद्ध करने की बात सामने आई, न साथी उद्यमियों ने गला घोंटने का आरोप लगाया या पीठ में खंजर घोंपने की आह भरी । यहां सांसद का हाथ पकड़ कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का बड़ा सा रंगीन लिफाफा पॉकेट में लिए चलनेवाले यह सफेदपोश माफिया संघ की शक्ति का जनता की भलाई में कितना इस्तेमाल करते हैं, इसका अंदाज आम लोग भी लगाने लगे हैं जब खुद उनकी ही बिरादरी के लोगों का पैसा इन्हीं की शह पर मार-मारकर उनके भतीजे ने अनेक लोगों को सडक़ पर लाकर खड़ा कर दिया हो , लेकिन यह सफेदपोश इस पर कोई पहल करने के बजाय हाथ झाड़ कर खड़ा हो जाते हैं . अर्थात जब भतीजे की करतूत से लोगों को राहत नहीं दिला सकते तब संघ के असली स्वरुप से इस आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोगों का भरोसा कैसे कायम करा सकते हैं ? वास्तव में संघ की शक्ति का जनता की भलाई में शायद ही इस्तेमाल होता है, अलबत्ता खुद का कारोबार बढ़ाने में सारी ताकत लगती है. कारोबार में अनीति से परहेज नहीं और नीति का ढोंग बखारने से मंच पर फुर्सत नहीं. मुंह में राम, बगल में छुरी वाली कहावत शायद यहां बहुत हल्की होगी. यह प्रसंग जमशेदपुर में अधिकतर मारवाड़ी समाज से ही कारोबार के लिये उगाहे गये करोड़ों रुपये का है. कंस्ट्रक्शन व्यापार में भतीजे को आगे कर 20 से 25 करोड़ रु. की धोखाधड़ी का शिकार जुगसलाई से लेकर बोकारो तक के लोग हुए हैं. इस धोखाधड़ी में बड़े व्यापारी ही नहीं ,छोटे नौकरी पेशा वाले लोग भी शामिल हैं। ऐसे लोगों ने बैंक से कर्ज लेकर फ्लैट की आस में निवेश किया लेकिन सच्चाई है कि एक फ्लैट कई के नाम एग्रीमेंट किया गया। उसके बाद भी एग्रीमेंट किसी के नाम और फ्लैट में रहता कोई और हो । सोनारी के चर्चित नवलखा अपार्टमेंट में लोगों को टोपी पहनने के जुर्म में जेल जाने वाले बिल्डर को इस भतीजे ने यहां बहुत पीछे छोड़ दिया हैं। इनका भतीजा कहता है उसने चार्टड अकाउंटेंसी में कुछ ज्यादा ही पढ़ाई की जिसके बाद दिमाग मेरा और ताकत चाचा की चल निकली । करोड़ों रुपये के इस उगाही में भतीजा जब फंसा तब उसे जेल भिजवाकर खुद हाथ झाडक़र खड़ा होनेवाला कोई साधारण शख्स नहीं हो सकता. यह यही सफेदपोश हैं। यहां उल्लेखनीय है कि समय और परिस्थिति के अनुसार हाथ झाडऩे और रंग बदलने में इनके नाम कई चर्चे हैं. हाल ही आदित्यपुर नगर निगम चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी को सामने से संघ का समर्थन और पीछे से धोखा करते इनका चेहरा पार्टी ने नजदीक से देखा. बाजार से प्रोपर्टी डीलिंग और बिल्डिंग निर्माण में पैसे बटोरने वाला भतीजा को इनका हर तरह का संरक्षण प्राप्त है ,लेकिन जब लोग उनके पास अपना दुखड़ा लेकर जाते हैं कि आप गार्जियन हैं, भतीजे को सामने बुलाइये और पैसे दिलवाने में मदद करिए, तब दूध से धुले गाजर की तरह दोनों हाथ उठाए बड़े भोलेपन से जवाब देते हैं वह न मेरे संपर्क में रहता है और न बात मानता है. एक पुलिस अफसर को भी ऐसा जवाब देते नहीं संकोच करते।आश्चर्य है कि जब धोखाधड़ी के मामले में हाल ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तब खून का यह रिश्ता खुलेआम जग गया और उसको बचाने में लग गया। उसे जेल से छुड़ाने के लिए कई तिकड़म खेले गए । जेल डॉक्टर को पैरवी करते हैं कि जेल के कठिन वार्ड से बेहतर जेल अस्पताल वार्ड में रखवा देने की कृपा करें. तत्कालीन एस एस पी के पास भी किसने पैरवी की, यह भी छिपा नहीं रहा। जाहिर सी बात है ऐसी पैरवी असाधारण और अनीति पूर्ण ही होती है, जबकि संघ शुचिता और सामाजिकता का संदेश देनेवाला संगठन है. सर्वविदित है कि संघ के लिफाफे में राजनेता, अफसर, वकील सब आ जाते हैं. एक सांसद को तो जैसे यह सफेदपोश अपना साझेदार और राजदार होने का दावा करता रहा . बताता रहा सांसद तो बचपन से उसका पड़ोसी रहे . फिलहाल सांसद से तनातनी के बाद लोग शकुन ले रहे कि माफिया की जकड़ से औद्योगिक इलाका शायद मुक्त हो सके।
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में अनगिनत कारनामों, सांसद से संबंधों का खुलेआम दुरुपयोग, संघ के सहारे रक्षा मंत्रालय से रेलवे,डिफेंस, आदि उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग हासिल करने की कवायद, जियाडा से लाभ सहित आयकर विभाग की छापेमारी संबंधित मसले संघ से जुड़ी संस्था लघु उद्योगयू भारती को नख- दंत विहीन बनाकर पॉकेट संस्था बनाने की चाल, एसिया पर कब्जा, “एको अहम द्विजो नास्ती ” जैसी हरकतों से जुड़ी बातों की लंबी फेहरिस्त है जो समय के अनुसार एसिया, लघु भारती के सदस्यों ने उजागर करने का दावा किया है । अगले अंकों में जारी… कैसे बैंक ने स्वीकृत किया है 300 करोड़ रु का ओवरड्राफ्ट ? काले धन को सफेद करने में बैंक ओ डी का सहारा….क्या आदित्यपुर में कोका कोला फैक्ट्री परिसर की जमीन का औद्योगिक उपयोग वाला नेचर बदल कर गाय का गौहाल ( खटाल) बनाने के लिए कर दिया गया है ? जियाडा क्यों चुप जमीन के इस प्रकार उद्योग के बजाय खटाल बनाने के दुरुपयोग पर ? कहां से बरस रहा इतना धन कि आम आदमी के बूते से बाहर सब्जियां टेम्पू भर भर कर लायी जाती हैं इस खटाल में पशुओं की सेवा के लिए ?

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