नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले में दिल्ली के मेदांता अस्पताल में भर्ती प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को एक भावुक और कड़ा पत्र लिखा है। अस्पताल के बेड से लिखे इस पत्र में वांगचुक ने मंगलवार रात दोनों नेताओं की यात्रा का जिक्र करते हुए अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने अपनी दो प्रमुख शर्तें रखी हैं।
सोनम वांगचुक ने मंत्रियों की अस्पताल यात्रा और अनशन वापस लेने की अपील के लिए धन्यवाद देते हुए याद दिलाया कि मंत्रियों ने निम्नलिखित मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया था।
- परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा देना।
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के विचार समेत पूरी जवाबदेही तय करने के लिए संसद में एक सार्थक चर्चा कराना।
‘चलो संसद’ मार्च और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
वांगचुक ने पत्र में लिखा कि 20 जुलाई 2026 को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च पुलिसिया बर्बरता और अनुचित बल प्रयोग के बावजूद पूरी तरह से शांतिपूर्ण था। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया और देश ने लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के प्रति युवाओं के धैर्य को देखा है।
“प्रदर्शनकारी युवाओं पर न हो कोई कानूनी कार्रवाई”
वांगचुक ने खुलासा किया कि मंत्रियों की मुलाकात के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।
वांगचुक ने लिखा, “मैं सांसदों की बात से सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों, शिक्षा और देश सेवा के अपने काम पर वापस लौटना चाहता हूं। लेकिन मैं ऐसा उन युवाओं की बलि देकर नहीं कर सकता जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।”
उन्होंने सरकार से साफ और सीधा आश्वासन मांगा कि आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कानूनी, दंडात्मक या बदले की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनका एकमात्र “अपराध” एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना था।
अनशन जारी रखने की चेतावनी
सोनम वांगचुक ने पत्र के आखिर में साफ किया कि अगर सरकार यह लिखित आश्वासन देती है कि युवाओं को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा, तो वे इस विश्वास के साथ अपना अनशन खत्म कर देंगे कि सरकार ने लाखों युवाओं की आवाज सुनी है। अगर ऐसा आश्वासन नहीं मिलता है, तो वे अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने के लिए मजबूर होंगे।
सोनम वांगचुक की आखिर में लिखा, “हमारे लोकतंत्र का भविष्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह अपने समर्थकों के साथ कैसा व्यवहार करता है, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि जब उसके युवा नागरिक साहस, उम्मीद और दृढ़ विश्वास के साथ बोलते हैं, तो सरकार उनके साथ कैसा व्यवहार करती है।”
