मनोहरपुर: प्रतिबंधित नक्सली संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को लेकर कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के अनुसार, मिसिर बेसरा इन दिनों अपने कुछ करीबी साथियों के साथ कोल्हान के जंगलों में लगातार ठिकाना बदलते हुए घूम रहा है। बताया जा रहा है कि उसके साथ 25 लाख रुपये का इनामी नक्सली बुधराम दा उर्फ अजय महतो , 15 लाख का इनामी मोछु ऊर्फ विभीषण, गौरव उर्फ विरेंद्र हांसदा तथा एक महिला नक्सली भी मौजूद है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के बीच यह चर्चा है कि लगातार दबाव और संगठन की कमजोर होती स्थिति के कारण मिसिर बेसरा के सामने आत्मसमर्पण या मुठभेड़ में मारे जाने जैसी परिस्थितियां खड़ी हो गई हैं। बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और जंगलों में स्थापित सुरक्षा कैंपों ने नक्सलियों की गतिविधियों को काफी सीमित कर दिया है।
एक घटना के बाद बढ़ा सुरक्षा बलों का दबाव 24 अप्रैल को दुगुनिया क्षेत्र में पूर्व नक्सली रमेश चाम्पिया की हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सक्रिय हो गईं। घटना के बाद यह संकेत मिला कि नक्सली दस्ते कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय हैं। इसके बाद सुरक्षा बलों ने रणनीति तेज करते हुए अभियान चलाया।
29 अप्रैल को रुटुगुटु जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान एक लाख रुपये के इनामी नक्सली इजराइल पुर्ती के मारे जाने की सूचना सामने आई। इसके बाद संगठन के कई सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे नक्सली संगठन की पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है। सरेंडर की अटकलें, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि लगातार घटते जनाधार, सहयोगियों के आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों के दबाव के कारण मिसिर बेसरा पर भी मानसिक दबाव बढ़ा है। इसी वजह से उसके आत्मसमर्पण की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अब तक पुलिस सीआरपीएफ या किसी सरकारी एजेंसी की ओर से उसके सरेंडर को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि वर्षों तक कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय रहा यह शीर्ष नक्सली नेता आत्मसमर्पण का रास्ता चुनता है या सुरक्षा बलों के अभियानों का सामना करता है।
