केरल में इस्लामिक स्कॉलर द्वारा महिलाओं को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद मामला बढ़ गया है। मुख्यमंत्री वी.डी.सतीशन ने इस मामले में स्कॉलर की आलोचना करते हुए उनकी इस सोच को 19वीं सदी का बताया। मुख्यमंत्री का बयान सामने आने के बाद कुछ इस्लामिक स्कॉलर्स ने उनसे मुलाकात की और बाद में उनके बयान पर आपत्ति भी जताई। केरल के सबसे बड़े मुस्लिम संगठनों में से एक ‘केरल जेम-इय्यतुल उलेमा’ के अध्यक्ष जिफरी मुथुकोया थंगल ने मुख्यमंत्री पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि आस्था के मामलों पर बोलने के लिए किसी भी धार्मिक विद्वानों को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री से मिलने के लिए पहुंचे इस्लामिक स्कॉलर्स में शामिल थंगल ने बताया कि सीएम के साथ बातचीत पिछले काफी समय से तय थी। लेकिन उनके द्वारा हाल में दिया गया बयान इस बैठक में बहस का केंद्र बन गया। थंगल ने कहा, “शरिया हर दौर में मान्य है। यह पवित्र कुरान का फैसला है। आप चाहें तो इसे मान सकते हैं या नहीं। अगर यह हमारे दौर के हिसाब से सही नहीं है, तो आपको इसे मानने की जरूरत नहीं है। लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की तरफ से ऐसे बयान नहीं आने चाहिए।”
क्या है केरल के इस्लामिक स्कॉलर और सीएम सतीशन के बीच का विवाद?
केरल के इस्लामिक धर्मगुरु कांथापुरम के एपी अबूबकर मुसलियार ने महिलाओं को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को घर में ही सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक जगहों पर नहीं जाना चाहिए। अगर महिलाएं ऐसा करती हैं, तो इससे भारी तबाही होगी।
इस्लामिक स्कॉलर की तरफ से आई इन टिप्पणियों का केरल में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही भारी विरोध किया। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने इस सोच को 19वीं सदी की बताया। उन्होंने कहा कि बयान इस्लाम में महिलाओं के इतिहास और आधुनिक समाज के मूल्यों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने इस्लामिक इतिहास का जिक्र करते हुए पैगम्बर मुहम्मद की पहली पत्नी खादीजा और दूसरी पत्नी आयशा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों ने ही पैगम्बर मुहम्मद के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, “पैगंबर की पहली पत्नी खदीजा एक बड़ी व्यवसायी थीं। पैगंबर की एक और पत्नी आयशा ने ‘बैटल ऑफ द कैमल’ (ऊँट की लड़ाई) में हिस्सा लिया था। वह कमांडर-इन-चीफ थीं।”
इस्लामिक स्कॉलर पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे में इस्लामिक इतिहास में भी महिलाओं के भागीदारी का जिक्र मिलता है। उन्होंने कहा, “हम 21वीं सदी में 19वीं सदी जैसी सोच को जाहिर करने का कड़ा विरोध करते हैं। हमारा नजरिया यह है कि महिलाओं को केवल घर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बल्कि उन्हें मुख्यधारा में आना चाहिए।”
मुख्यमंत्री के इन बयानों का हुआ विरोध
मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद इस्लामिक स्कॉलर्स के एक गुट ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। इस गुट ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने इस्लामिक इतिहास को गलत तरीके से पेश किया है। खबरों के मुताबिक, नेताओं बैठक के दौरान भी इन इस्लामिक नेताओं और मुख्यमंत्री के बीच में काफी बहस हुई। हालांकि, इस पर आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया।
कांथापुरम के इस्लामिक स्कॉलर द्वारा दिए गए बयान का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री से मिलने गए मौलवी नसर फैजी कूदाथायी ने भी अपना बयान दिया। उन्होंने कहा कि मौलवी की बातों को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने महिलाओं को घर तक सीमित रखने की बात नहीं कि थी बल्कि वह महिलाओं के किसी दिखावे की चीज की तरह पेश किए जाने का विरोध कर रहे थे।
केरल के एक और इस्लामिक संगठन ‘ऑल इंडिया सुन्नी जमिय्यतुल उलमा’ से जुड़े सुन्नी स्टूडेंट फेडरेशन ने एक लाइन लिखकर मुख्यमंत्री का विरोध किया। उन्होंने लिखा,”धर्म क्या है इसकी व्याख्या करना राज्य का काम नहीं है। मुख्यमंत्री को जिम्मेदारी के साथ अपना शासन चलाना चाहिए।”
फिलहाल इस्लामिक स्कॉलर्स की तरफ से आए इस विरोध पर केरल मुख्यमंत्री की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।
