टाटा स्टील में बोनस समझौता आज, फार्मूले के तहत 304 करोड़ की आ रही राशि, पर 320 करोड़ तक मिलने की संभावना

पुराने बेसिक पर मिलेगी बोनस की राशि, नए ग्रेड पर अगले वर्ष से
जमशेदपुर: : टाटा स्टील कर्मचारियों का गुरुवार को बोनस समझौता होना तय है. इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है. इस वर्ष कर्मचारियों के बीच करीब 320 करोड़ रुपये तक बोनस की राशि बंटने की संभावना है, हालांकि इस बार भी पुराने फार्मूले के आधार पर बोनस समझौता हो रहा है जिसके तहत करीब 304 करोड़ रुपये की राशि बन रही है, इसलिए आज सुबह 9 बजे से एमडी स्तर पर वार्ता होगी जिसके बाद यूनियन नेतृत्व 304 करोड़ रुपये की राशि में अतिरिक्ति राशि दिलाने का प्रयास करेगी.
टाटा स्टील कर्मचारियों के बोनस समझौता को लेकर बुधवार की शाम करीब साढ़े चार बजे से साढ़े आठ बजे तक कंपनी के बोर्ड रूम में कंपनी के सीएचआरओ इंडिया ऑपरेशन जुबिन पालिया व हेड एचआरएम राहुल दुबे के साथ टाटा वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी, डिप्टी प्रेसीडेंट शैलेश सिंह व महामंत्री सतीश सिंह की बैठक हुई. टाटा स्टील को 2025-26 में 10,886 करोड़ रुपे का शुद्ध मुनाफा हुआ था. ऐसे में यूनियन कर्मचारियों के खाते में पुराने फार्मूले के तहत इस बार करीब 304 करोड़ रुपये की राशि बोनस के रूप में बन रही है. पिछले वर्ष 303.13 करोड़ रुपये का बोनस मिला था, जबकि फार्मूले के तहत 272 करोड़ रुपये की राशि आ रही थी. यूनियन नेतृत्व पिछली बार 30.30 करोड़ रुपये अतिरिक्त राशि लेने में कामयाब रही थी. वहीं इस बार अब तक प्रबंधन ने अधिक राशि देने से इंकार किया है. अब यूनियन अधिक से अधिक कितनी राशि ले पायेगी यह नेतृत्च क्षमता पर निर्भर करता है. आज सुबह नौ बजे से यूनियन नेतृत्व की कंपनी के सीईओ व ग्लोबल प्रबंध निदेशक टी वी नरेन्द्रन से बातचीत होगी. उनसे अधिक राशि दिलाने का प्रयास करेंगे.
इस बार कर्मचारियों को पुराने डीए व बेसिक के आधार पर बोनस मिलेगा. ग्रेड रिवीजन समझौता एक जनवरी, 2025 से प्रभावी हुआ है, लेकिन मार्च, 2025 का बोनस पिछले वर्ष मिल चुका है. अभी तक कर्मचारियों को एरियर भी नहीं मिलेगा इसलिए बोनस की राशि कर्मचारियों के पुराने बेसिक व डीए के आधार पर मिलेगी.
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बोनस के बाद फिर शुरू होगा आपस में आरोप-प्रत्यारोप
टाटा स्टील में कर्मचारियों का ग्रेड रिवीजन समझौता होने के बाद यूनियन नेतृत्व में आपस फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. ग्रेड रिवीजन समझौता होने के बाद समझौते के तहत कर्मचारियों का बंचिंग होने, विसंगतियों होने के लिए महामंत्री सतीश सिंह ने अध्यक्ष संजीव चौधरी को जिम्मेदार ठहराया है. पिछले दिनों कमेटी मीटिंग में भी यह देखने के लिए मिल चुका है. अब कर्मचारियों को इस बार पुराने बेसिक व डीए के आधार पर बोनस होगा, इसलिए संभावना है कि बोनस समझौता के बाद फिर आपस में यूनियन नेतृत्व भिड़ेेगा. समझौता के लिए खुद जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करेंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि बोनस समझौता रहे या कोई अन्य समझौता प्रबंधन के साथ यूनियन अध्यक्ष, डिप्टी प्रेसीडेंट व महामंत्री की बातचीत होती है. इसके लिए कहीं न कहीं अध्यक्ष, डिप्टी प्रेसीडेंट व महामंत्री के जिम्मेदार कहा जाता.

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