रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं का मामला थमता नजर नहीं आ रहा है. JPSC का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल होने के बाद अब इस मामले को लेकर कानूनी स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है.
JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका अब मामले की जांच और परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रही है. याचिका सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में डायरी नंबर 47998/2026 के तहत दर्ज है. इसमें 19 अप्रैल 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी, स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की है. इसके लिए जांच CBI को सौंपने या सुप्रीम कोर्ट अथवा झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने का अनुरोध किया गया है. याचिका में 19 अप्रैल की परीक्षा को रद्द कर अदालत की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा परीक्षा कराने की मांग भी रखी गई है.
याचिका के मुताबिक, 2 जुलाई 2026 को JPSC प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद विवाद और गहरा गया. इसके बाद एक सफल अभ्यर्थी की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल होने की बात सामने आई. आरोप लगाया गया कि संबंधित अभ्यर्थी ने पहले पेपर में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, फिर भी उसे सफल घोषित किया गया. याचिका में JPSC के एक आधिकारिक नोटिस का भी हवाला दिया गया है, जिसमें CID Case No. 16/2026 के तहत जांच जारी होने की जानकारी दी गई थी. साथ ही सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच Paper-I और Paper-II की OMR कार्बन कॉपी जमा करने को कहा गया था. याचिका में OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है.
इधर, परीक्षा विवाद को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है. याचिका के अनुसार, छात्रों ने 25 जुलाई 2026 को बापू वाटिका से आंदोलन शुरू किया था, जो बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक पहुंचा. छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं. याचिका में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनशन का भी उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है. इनमें मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, अटेंडेंस शीट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग रिकॉर्ड और मूल्यांकन डेटा शामिल हैं. मामले में सीनियर एडवोकेट सोनिया माथुर के साथ अन्य अधिवक्ता पैरवी कर रहे हैं.
