नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया.
यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया. सीनियर वकील मनन कुमार मिश्रा और वकील सत्यम सिंह ने याचिकाकर्ता की तरफ से केस लड़ा.
पीठ ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग और दूसरों से जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता, कार्यकर्ता हरिशरण देवगण की ओर से पेश मिश्रा ने कहा कि याचिका में सीबीाई जांच या इस कोर्ट के किसी पूर्व जज से जांच की मांग की गई है.
याचिका में एक अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से प्रतिवादी संख्या 2-झारखंड लोक सेवा आयोग को 19 अप्रैल को हुई ‘झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा-2025’ को रद करने और उसके बाद कानून के हिसाब से और सुप्रीम कोर्ट से मंज़ूर सुरक्षा उपायों के तहत एक नई प्रारंभिक परीक्षा कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह सीबीआई को निर्देश दे कि वह प्रतिवादी संख्या 2 के विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत आयोजित ‘झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा-2025’ जुड़े आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष, पूरी और समय पर जांच करे.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या झारखंड के बाहर के किसी हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस या जज की अगुवाई में एक स्वतंत्र समिति बनाने का निर्देश दिया जाए, जिसमें फोरेंसिक साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, ओएमआर मूल्यांकन, साइबर सिक्योरिटी और और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन उस परीक्षा की ईमानदारी की जांच करें.
याचिका में ओएमआर स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट बनाने वाले सिस्टम के स्वतंत्र ऑडिट के बारे में भी निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह जांच एजेंसी या स्वतंत्र समिति को यह तय करने का निर्देश दे कि क्या वस्तुनिष्ठ और सत्यापन योग्य सामग्री के आधार पर दागी और बेदाग उम्मीदवारों को भरोसेमंद तरीके से अलग किया जा सकता है.
