टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2032 तक बढ़ा दिया गया है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को नया कार्यकाल देने को मंजूरी दी। कंपनी को शेयर मार्केट में उतारने का भी निर्णय लिया गया है।
अभी चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था। तब नोएल टाटा से मतभेद और ट्रस्ट में खींचतान की वजह बनी थी।
एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने के फैसले को अभी सालाना आम बैठक में मंजूरी मिलनी है, जिसमें टाटा ट्रस्ट की 66% हिस्सेदारी है। ट्रस्ट के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा फैसले के खिलाफ हैं, जबकि वेनु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया है।
ग्रुप में पहली बार रिटायरमेंट की उम्र के बाद भी कार्यकाल बढ़ा
टाटा ग्रुप में पहली बार कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव 65 साल की तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी पद पर बना रहेगा। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। हालांकि, नॉन-एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं।
चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। उनका नया कार्यकाल 2032 में खत्म होगा, तब वे 70 साल के होंगे। चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया। उन्होंने 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर करियर शुरू किया था।
12 अगस्त को लिखा था- एक सदस्य के विरोध के चलते इस्तीफा दे रहा हूं
चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को पद से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान उन्होंने भावुक पोस्ट लिखी थी। उन्होंने कहा था कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।
इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।
हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”
चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू ₹16.24 लाख करोड़ पहुंचा
चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।
रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ हो गया।
मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ हो गया।
मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में ₹24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क जानिए
टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
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टाटा-संस को 3 साल में IPO लाना ही होगा: RBI ने शेयर मार्केट में लिस्ट न होने की अर्जी खारिज की, छोटे निवेशकों को मौका मिलेगा
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को 3 साल में अपना IPO लाना ही होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने टाटा संस की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी का दर्जा छोड़ने की मांग की थी।
टाटा संस ने 2024 में ₹21,813 करोड़ का अपना सारा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का कहना था कि अब उस पर कोई कर्ज नहीं है, इसलिए उसे NBFC की कैटेगरी से बाहर किया जाए, लेकिन RBI ने इस मांग को नहीं माना।
