टीडब्ल्यूयू ग्रेड रिवीजन का बचाव करने नहीं, उसकी खामियों पर सवाल उठाने गए थे: विमल व विभाष शुक्ला

टाटा वर्कर्स यूनियन की सोमवार को हुई कमिटी मीटिंग में हुए हंगामे पर कमेटी सदस्य विमल कुमार व विभाष शुक्ला ने स्पष्ट किया कि कुछ लोगों द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि हमलोग ग्रेड रिवीजन का बचाव करने के लिए मंच पर गए थे, जो पूरी तरह गलत है.
उन्होंने कहा कि कहा कि हमलोग ग्रेड रिवीजन का बचाव करने नहीं, बल्कि यह कहने के लिए मंच पर गए थे कि वर्तमान ग्रेड रिवीजन में गंभीर खामियां और विसंगतियां हैं और इसकी जिम्मेदारी यूनियन के टॉप-3 नेतृत्व की है, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने तक का अवसर नहीं दिया गया. सतीश सिंह और उनके समर्थकों द्वारा लगातार बोलने से रोकने की कोशिश की गई.
उन्होंने कहा कि महामंत्री जी हर ग्रेड रिवीजन के बाद यही करते हैं समझौते के समय जिम्मेदारी लेते हैं और जब कर्मचारियों के बीच सवाल उठते हैं तो उसकी जिम्मेदारी दूसरे के माथे मढऩे लगते हैं. ग्रेड रिवीजन के दस्तावेज के प्रत्येक पन्ने पर महामंत्री का हस्ताक्षर कराया जाता है, जिसका उद्देश्य यही है कि वे दस्तावेज को अच्छी तरह पढ़ें, समझें और अपनी जिम्मेदारी के साथ उस पर हस्ताक्षर करें। ऐसे में बाद में किसी कमी या विसंगति के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले जब ग्रेड रिवीजन की विसंगतियों पर चर्चा के लिए 11 ऑफिस बियररों की बैठक हुई थी, तब भी महामंत्री महोदय लगभग पांच मिनट के अंदर ही बैठक छोडक़र चले गए. इतना ही नहीं, मैनेजमेंट के साथ हुई चर्चा में भी बंचिंग सिस्टम का बचाव किया गया। आज जब उसी व्यवस्था के कारण कर्मचारियों के बीच सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी लेने के बजाय भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कमिटी मीटिंग के एक दिन पहले चुनिंदा लोगों के साथ कैंसर रेस्ट हाउस जैसे स्थान पर बैठक कर यह रणनीति बनाई गई थी कि अगली कमिटी मीटिंग में किन लोगों को बोलने दिया जाए और किन्हें नहीं. यदि यह सच है, तो यह यूनियन की लोकतांत्रिक परंपरा के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्हेंने कहा कि हम ग्रेड रिवीजन के बचाव में स्टेज पर नहीं गए थे. हम तो कर्मचारियों के नुकसान और ग्रेड रिवीजन की विसंगतियों पर सवाल उठाने गए थे, इसलिए यह कहना कि हम ग्रेड रिवीजन का बचाव कर रहे थे, कर्मचारियों को गुमराह करने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को यह समझना होगा कि जो लोग दो-दो ग्रेड रिवीजन में कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाने वाली व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं, वे आज अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। समझौते के समय नेतृत्व की भूमिका होती है और उसके परिणाम की जिम्मेदारी भी उसी नेतृत्व की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हम किसी व्यक्तिगत विवाद या हंगामे के पक्ष में नहीं हैं, उनकी लड़ाई कर्मचारियों के अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए है.

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