एक अदद   आम के पौधा के मिले 100 डॉलर ! पर्यावरण दिवस पर पप्पू सरदार की पहल ने जीता दिल

जमशेदपुर में विश्व पर्यावरण दिवस पर एक ऐसा दिलचस्प और प्रेरणादायक वाकया सामने आया, जिसने यह साबित कर दिया कि नेक इरादों का प्रतिफल कई गुना होकर लौटता है। आमतौर पर फलदार पौधों की कीमत कुछ सौ रुपये तक होती है, लेकिन एक आम का पौधा 100 डॉलर यानी करीब 9,600 रुपये का “मूल्य” पा गया। हालांकि यह कोई खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सम्मान और भावनाओं का प्रतीक था।
आदित्यपुर निवासी प्रवासी भारतीय प्रमोद आहूजा, जो अमेरिका में रहते हैं और इन दिनों जमशेदपुर आए हुए हैं, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अपनी दिवंगत मां की स्मृति में एक पौधा लगाना चाहते थे। प्रधानमंत्री Narendra Modi के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से प्रेरित होकर वे साकची बाजार पहुंचे। वहां उनकी नजर माधुरी दीक्षित के प्रशंसक और सामाजिक कार्यों के लिए चर्चित पप्पू सरदार की दुकान मनोहर चाट के सामने रखे गए फलदार पौधों पर पड़ी।
प्रमोद आहूजा ने अपनी माँ अमृत आहूजा की स्मृति में एक पौधा लेने की इच्छा जताई और उसकी कीमत पूछी। पप्पू सरदार ने बताया कि पर्यावरण दिवस के अवसर पर वे सभी पौधे निशुल्क वितरित कर रहे हैं, इसलिए इसके लिए कोई राशि नहीं देनी होगी। लेकिन प्रमोद आहूजा पौधे के बदले कुछ न कुछ देने पर अड़े रहे, जबकि पप्पू सरदार एक पैसा भी लेने को तैयार नहीं थे।
आखिरकार प्रमोद आहूजा पौधा लेकर चले गए, लेकिन कुछ देर बाद वापस लौटे। उन्होंने अपनी जेब से 100 डॉलर का नोट निकाला और पप्पू सरदार को भेंट करते हुए कहा कि यह उनकी ओर से प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। पप्पू सरदार को उस समय यह भी अंदाजा नहीं था कि भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 9,600 रुपये है। उन्होंने इसे स्नेहपूर्वक स्वीकार कर लिया।
यह घटना इस कहावत को चरितार्थ करती है कि यदि नीयत साफ हो और काम समाजहित में हो, तो उसका प्रतिफल अपेक्षा से कहीं अधिक मिलता है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पप्पू सरदार ने 400 से अधिक फलदार पौधों का निशुल्क वितरण किया। “एक पेड़ मां के नाम” की भावना से जुड़े इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने पौधे लेकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
एक आम के पौधे के बहाने सामने आई यह कहानी न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देती है, बल्कि यह भी बताती है कि सेवा और सद्भावना की कीमत धन से नहीं, बल्कि भावनाओं से तय होती है।

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