नई दिल्ली:
राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO का ऐलान हो गया है. भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिली है. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली थी.
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र शर्मा?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं, उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया. इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया था. वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ भी रह चुके हैं.
मिश्रा नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगल के पूर्व छात्र हैं. वे एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मोंटगोमरी, अलबामा और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के भी पूर्व छात्र हैं.
पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उनकी अहम भूमिका रही है.
1999 में कारगिल युद्ध के समय ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के दौरान उन्होंने मिराज 2000 से पाकिस्तानी सेना
पर बमबारी की थी. वहीं, पिछले साल पहलगाम अटैक के बाद हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की कमान इन्हीं के हाथों
में थी.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उनकी अहम भूमिका के लिए उन्हें पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर सर्वोत्तम युद्ध सेवा
मेडल से सम्मानित किया गया था. इससे पहले 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट
सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था.
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में अहम भूमिका
जीतेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था.
लगभग 40 साल के करियर में उन्होंने 3 हजार घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव है. उन्होंने 18 से
ज्यादा तरह के लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं.
स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000
एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल बाद में ‘ऑपरेशन सफ़ेद
सागर’ के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हुए हमलों में किया गया था.
वायुसेना में रहते हुए उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और एयर
हेडक्वार्टर में ऑपरेशन प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में क्या था रोल?
एयर मार्शल की रैंक पर प्रमोट होने के बाद 9 जनवरी 2023 को उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ
में नियुक्त किया गया था. इसके बाद उन्हें 5 दिसंबर 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन) में डिप्टी
चीफ नियुक्त किया गया.
1 जनवरी 2025 को उन्हें वायुसेना की वेस्टर्न कमांड का कमांडिंग इन चीफ बनाया गया. वायुसेना की इसी
कमांड पर पाकिस्तान से लगने वाली सरहद की सुरक्षा की कमान है. पिछले साल पहलगाम अटैक के बाद जब
6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया था, तब इसकी कमान रिटायर्ड एयर मिश्रा
जीतेंद्र मिश्रा के पास ही थी.
हाल ही में न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान S-400
सिस्टम का पता लगाने के लिए पाकिस्तान बेताब था और इसके लिए उसने जासूसों और स्लीपर सेल को
एक्टिवेट कर दिया था.
अपनी टीम के साथ रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा. (फाइल फोटो)
अपनी टीम के साथ रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा. (फाइल फोटो)
उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान यह पता लगाने के लिए बेताब था कि ये S-400 कहां हैं? उन्होंने हर मुमकिन
तरीका अपनाया. उन्हें दूसरे देशों से सैटेलाइट से भी मदद मिल रही थी. जब भी वे (पाकिस्तान) हवा में आते,
उन्हें S-400 से मार गिराया जाता. उनके लिए S-400 सबसे बड़ा खतरा था. उन्होंने S-400 की
लोकेशन का पता लगाने के लिए भारत के अंदर भी जासूसों और स्लीपर सेल को एक्टिवेट किया था.’
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एयरबोर्न रडार सिस्टम के जरिए भारतीय ऑपरेशन का पता लगा सकता था. उन्होंने
यह भी बताया कि S-400 ऑपरेटर ने आने वाले टारगेट पर हमला करने की इजाजत मांगी थी.
उन्होंने कहा, ‘वे सिर्फ एयरबोर्न रडार के जरिए ही देख सकते थे. मेरे S-400 ऑपरेटर ने मुझसे पूछा कि
क्या वह शूट कर सकता है. मैंने कहा, ‘शूट करो.’ और जब शूट किया तो हमने उसे 314 किलोमीटर की दूरी
पर मार गिराया.’
