दवा कंपनियां डॉक्टरों को नहीं दे पाएंगी महंगे तोहफे और विदेश यात्राओं के ऑफर, सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह निर्देश

दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को कीमती तोहफे, विदेश यात्राएं और अन्य मुफ्त चीजें (फ्रीबीज) देकर अपनी कंपनी की दवाएं लिखवाने के खेल पर अब पूरी तरह लगाम लगने वाली है. दवा कंपनियां इस तरह के गलत या अनैतिक तरीकों से अपनी दवाओं का प्रचार न करें, इसके लिए अब एक विशेष समिति बनेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को इस कमेटी का गठन करने का सख्त निर्देश दिया है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सरकार को आदेश दिया कि वह कोर्ट के पुराने निर्देशों और टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए इस कमेटी का गठन करे. यह समिति उन सुझावों पर विचार करेगी और उपायों की सिफारिश करेगी जिससे इन गलत तरीकों पर रोक लगाई जा सके.
फैसले का मुख्य हिस्सा पढ़ते हुए जस्टिस मेहता ने कहा, “हमने भारत सरकार को कमेटी बनाने और हमारे पिछले निर्देशों व टिप्पणियों के आधार पर अपनी सिफारिशें देने का निर्देश दिया है. कोर्ट के इस आदेश का पालन हुआ है या नहीं, इस मामले को 29 जनवरी 2027 को दोबारा कोर्ट के सामने रखा जाएगा.”

यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FMRAI) द्वारा दायर की गई एक याचिका से शुरू हुआ. इस याचिका में दवा कंपनियों के मार्केटिंग के तरीकों को नियंत्रित करने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी नियम बनाने की मांग की गई थी. साथ ही, डॉक्टरों और मेडिकल प्रोफेशनल्स से जुड़े गलत या अनैतिक तौर-तरीकों का भी आरोप लगाया गया था.

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