टाटानगर बासुकीनाथ धर्मशाला में समधी को ट्रस्टी क्यों बनाया, इसका जवाब नहीं देते बना सफेदपोश स्क्रैप कारोबारी को। वैसे समधी और समधन से नाता -रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस रिश्ते के समक्ष दोनों पक्ष एक दूसरे से मधुर संबंध के साथ उनको बड़ा पेश करते हैं और खुद भी बड़ा बनना चाहते हैं। तभी तो सार्वजनिक संस्था टाटानगर बासुकीनाथ धर्मशाला में मौका ताड़कर अपने एक समधी को ही ट्रस्टी बना दिया। इस गिफ्टेड ट्रस्टी की पुत्री का विवाह सफेदपोश के बड़े भाई के घर में हुआ है। टूइलाडुंगरी निवासी इस ट्रस्टी का शायद ही किसी को पता हो, धर्मशाला निर्माण में क्या योगदान रहा। बात बड़े भाई के “शाह जी” की नज़र में ऊपर उठना हो और अपने घर, परिवार,संबंधी को भरोसेमंद बना कर मनमानी करना हो तो ऐसा हो सकता है। एसिया को ऐसे ही कब्ज़े में लेने का चाल चली गई थी। शाह जी की बात इसीलिए यहाँ महत्वपूर्ण हो जाती है कि यह सफेदपोश स्क्रैप कारोबारी एक ओर बड़े भाई के समधी को मनमाने ट्रस्टी बनाता है दूसरी ओर इस बड़े भाई के छोटे लड़के द्वारा शहर में 25 से 30 करोड़ रु के धोखा और पैसे बटोर कर भागने पर हाथ झाड़कर खड़ा हो जाता है कि बड़ा भाई अब उनसे कटा -कटा रहता है, भतीजा बात नहीं करता, न उनकी बात सुनता है, आदि। इस रवैये को क्या कहा जाय -दुरंगी नीति या दोहरा चेहरा । आश्चर्य है कि जब धोखाधड़ी के मामले में हाल ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तब खून का यह रिश्ता खुलेआम जग गया और उसको बचाने में लग गया…. उसे जेल से छुड़ाने के लिए कई तिकड़म खेले गए…..अगले अंकों में कैसे बिहारियों को बिहारियों से ही लड़ाकर उनका वध किया, इंडस्ट्रियल एरिया में स्क्रैप इकट्ठा करने के लिए कैसे चलती है माफियागिरी, किसके प्रभाव और बल पर टाटा स्टील में स्क्रैप की खरीदारी में बढ़ रही हिस्सेदारी, इंदौर में कौन लगा रहा नया फाउंड्री प्लांट और अंततः कैसे सांसद के बल और प्रभाव में बढ़ता चला गया है कारोबारी साम्राज्य….(जारी)
