कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की संस्मरण किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ को लेकर विवाद की खबरों के बीच पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सफाई दी है।
पेंगुइन ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत में इस किताब को पब्लिश नहीं करेगी। यह कहना सही नहीं है कि लेखक के संपादकीय बदलावों से इनकार करने के बाद उसने किताब प्रकाशित करने से हाथ खींच लिया है।
इससे पहले द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट दी थी कि पेंगुइन ने एक हिस्से में कुछ “एडिटोरियल बदलाव और हिस्से हटाने” की मांग की थी, लेकिन लेखकों ने इस मांग को ठुकरा दिया था।
किताब को पहले 10 नवंबर को प्रकाशित किया जाना था। इसमें सोनिया अपने राजनीतिक सफर और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले से जुड़े अनुभव साझा करेंगी.
विवाद के बाद पेंगुइन ने शुक्रवार को बयान जारी किया। इसमें कहा, वह बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ की प्रकाशक नहीं है। यह कहना सही नहीं है कि लेखक ने संपादकीय बदलावों से इनकार करने के कारण पेंगुइन ने प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया।सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पेंगुइन समूह दुनिया भर में इस किताब को प्रकाशित करने के लिए तैयार है, तो भारत में इसे लेकर अलग स्थिति क्यों है।
कांग्रेस का यह हमला उन खबरों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने पांडुलिपि में कुछ संपादकीय बदलाव और अंश हटाने को लेकर मतभेद के कारण किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया। हालांकि, प्रकाशन समूह की भारतीय इकाई ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
कांग्रेस ने तथ्य जांच के तर्क पर उठाया सवाल
कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘अगर पेंगुइन बुक्स दुनिया भर में इसे प्रकाशित कर सकता है, तो पेंगुइन का तथ्य जांच का दावा हास्यास्पद है।’ यह टिप्पणी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के उस बयान के संदर्भ में आई, जिसमें उसने कहा था कि किसी प्रकाशक के तौर पर तथ्य जांच करना और लेखक को किताब के हित में सुझाव देना उसका अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है।
रिपोर्ट में संपादकीय बदलाव पर मतभेद का दावा
एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि किताब की पांडुलिपि के एक हिस्से में प्रकाशक की ओर से संपादकीय बदलाव और कुछ अंश हटाने की मांग की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सोनिया गांधी ने कथित तौर पर इस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया। लेकिन कंपनी ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में ‘बिलॉन्गिंग’ का प्रकाशक नहीं है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘यह सुझाव कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने ‘बिलॉन्गिंग’ को इसलिए प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया क्योंकि लेखक ने संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं किए, परिस्थितियों को सही ढंग से नहीं दर्शाता।’
‘हम किताब छापने के इच्छुक और तैयार थे’
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि प्रकाशन की प्रक्रिया में तथ्य जांच और लेखकों को किताब के हित में सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने आगे कहा कि संबंधित बातचीत के दौरान कंपनी की स्थिति यह थी कि वह किताब प्रकाशित करने के लिए तैयार और इच्छुक थी। हालांकि, कंपनी ने सोनिया गांधी के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर आगे कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आएगी किताब
सोनिया गांधी की आत्मकथा 10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होने वाली है। इसे पेंगुइन रैंडम हाउस की इकाई अल्फ्रेड ए. नॉफ प्रकाशित करेगी। नॉफ पहले ही किताब के एक लाख प्रतियों के शुरुआती मुद्रण की घोषणा कर चुका है। ऐसे में विवाद का मुख्य सवाल यह है कि जिस किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन तय है, उसका भारत में प्रकाशक कौन होगा?
इटली से भारत तक की यात्रा और गांधी परिवार की त्रासदियां
‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में सोनिया गांधी के जीवन की यात्रा को शामिल किए जाने की बात कही गई है। किताब में युद्ध के बाद के इटली में उनके बचपन से लेकर भारत आने और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से विवाह तक की कहानी होगी। इसमें उनके जीवन की कुछ बड़ी त्रासदियों का भी जिक्र होने की उम्मीद है, जिनमें संजय गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की मौत शामिल है। किताब में उनके सार्वजनिक जीवन में प्रवेश और भारत के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक के केंद्र में बिताए गए वर्षों को भी शामिल किए जाने की संभावना है।
सोनिया गांधी ने क्या कहा?
प्रकाशक की घोषणा के दौरान सोनिया गांधी ने कहा था, ‘मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम विवरण ऐसे रहे हैं जो उनके उद्देश्यों, उनके कार्यों और यहां तक कि उनकी मानवीय कमजोरियों की सच्चाई तक पहुंच सके। मेरी कहानी पाठकों को उन सामाजिक और राजनीतिक बदलावों का एक अनोखा दृष्टिकोण भी देती है, जिनका मैं छह दशकों से साक्षी रही हूं।’
भारत में प्रकाशन को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन तय हो चुका है और पेंगुइन रैंडम हाउस की एक इकाई इसे प्रकाशित कर रही है। दूसरी तरफ, भारत में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इसके प्रकाशक के तौर पर सामने नहीं है। संपादकीय बदलाव को लेकर मतभेद की रिपोर्ट को कंपनी ने खारिज किया है और कहा है कि वह किताब प्रकाशित करने के लिए तैयार और इच्छुक थी। इसी विरोधाभास को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
