ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को मॉक संसद नहीं अब महाभियोग! , खरगे के घर आयोजन का बदला एजेंडा- 4.30 घंटे, 30 स्पीकर

नई दिल्ली: INDIA ब्लॉक कथित वोट चोरी या SIR गड़बड़ियों पर अपनी एकता दिखाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए वह 30 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार पर ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ करेगा. इस इवेंट को पार्लियामेंट का ‘मॉक’ सेशन बताने के कुछ दिनों बाद, कांग्रेस ने विवाद से बचने के लिए इसे ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ कहना शुरू कर दिया. यह ग्रुप 1 नवंबर को रामलीला ग्राउंड में इस मुद्दे पर बड़ी रैली की भी तैयारी कर रहा है.
इंडिया गठबंधन शुक्रवार को जो मॉक संसद करने वाली थी, उसमें कुछ बदलाव किया गया है. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि हम वैसा कुछ भी नहीं करना चाहते हैं जिससे संसद की अवमानना हो इसलिए हम मॉक संसद की बात ही नहीं कर रहे हैं. कांग्रेस ने शुक्रवार को होने वाले आयोजन का नाम “जन महाभियोग“ दिया है. जिसमें भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाया जाएगा. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कैसे किया जाएगा? ये जन महाभियोग क्या है और इसकी प्रक्रिया क्या होगी?

इंडिया ब्लॉक ने वोटर लिस्ट से करोड़ों मतदाताओं के कथित रूप से नाम हटाने के लिए CEC को जवाबदेह ठहराने के लिए एक पब्लिक इवेंट करने का फैसला किया. लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि उनकी ओर से पार्लियामेंट में पहले भी मोशन लाने की ऐसी ही कोशिश को लोकसभा और राज्यसभा के संबंधित चेयरपर्सन ने खारिज कर दिया था. अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि ब्लॉक का मकसद इस मुद्दे पर अपनी एकता दिखाना है.

कांग्रेस के लोकसभा सांसद मोहम्मद जावेद ने बताया, “पब्लिक इंपीचमेंट, का मकसद उस सरकार को बेनकाब करना है जो वोट चोरी से बनी है. यह मुद्दा संविधान में दिए गए अधिकारों से जुड़ा है जो सीधे जनता से जुड़ा है. विपक्ष ने पहले CEC को हटाने के लिए मोशन लाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी गई. अगर विपक्ष पार्लियामेंट के अंदर कोई चिंता नहीं जता सकता, तो इसे किसी पब्लिक जगह पर करना होगा. ज़्यादातर विपक्षी सांसद इस इवेंट में शामिल होंगे.”

पुलिस ने पहले अशोका होटल के लॉन में और बाद में रामलीला ग्राउंड में ही इवेंट की इजाज़त देने से मना कर दिया था. जिसके बाद CEC के ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ के लिए कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे के ऑफिशियल घर को चुना गया है. खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं और पहले भी ब्लॉक मीटिंग्स को कोऑर्डिनेट करते रहे हैं. साथ ही, पार्टी के अंदर के लोगों ने कहा कि केंद्र सरकार को टारगेट करने वाले इवेंट के लिए किसी इजाजत की जरूरत नहीं होगी.

केरल कांग्रेस के लोकसभा सांसद फ्रांसिस जॉर्ज ने बताया, “विपक्ष लोकसभा या राज्यसभा में ऐसा नहीं कर सका. इसलिए हमें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा। CEC के कामों को सामने लाने का यही एकमात्र डेमोक्रेटिक तरीका है, जिन्होंने संस्था को नुकसान पहुंचाया. ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ उन आरोपों को दोहराएगा जो हम पहले भी लगाते रहे हैं. हम CEC को हटाने की मांग करेंगे.”

ब्लॉक नेताओं ने 30 अक्टूबर के इवेंट की तैयारी के लिए गुरुवार को एक स्ट्रेटेजी मीटिंग की. ब्लॉक ने तय किया कि पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ की अध्यक्षता करेंगी, जिसे ज़्यादा लोगों के लिए सोशल मीडिया पर लाइव दिखाया जाएगा.

ब्लॉक के सदस्यों ने अलग-अलग फॉर्मेट पर चर्चा की कि इवेंट कैसे किया जा सकता है. संभावित सेटिंग्स में ओरिजिनल पार्लियामेंट सेटिंग्स की कॉपी, कोर्टरूम सेटिंग, या बस एक आम पब्लिक हियरिंग प्रोग्राम शामिल थे. ब्लॉक सदस्यों के लिए मुद्दा यह था कि वे चाहते थे कि इवेंट जितना हो सके असली दिखे, लेकिन पार्लियामेंट सेटिंग्स की नकल करके कोई विवाद नहीं खड़ा करना चाहते थे.

इसके अलावा, कोर्टरूम जैसी सेटिंग से ट्रायल जैसा इंप्रेशन मिलता और बेवजह का विवाद पैदा होता. इसलिए, आखिर में यह तय हुआ कि सेटिंग एक नॉर्मल पब्लिक कंसल्टेशन होगी, जहां अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को चेयर के सामने अपनी बात रखने का मौका मिलेगा.

इस ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ में लगभग 200 विपक्षी सांसदों के शामिल होने की संभावना है, वहीं सिविल सोसाइटी के सदस्य, कुछ कानूनी एक्सपर्ट जिनमें पूर्व जज शामिल हैं और SIR से प्रभावित कुछ नागरिक भी इस इवेंट में शामिल हो सकते हैं. अंदर के लोगों ने बताया कि सभी सीनियर ब्लॉक लीडर इवेंट में भाषण देंगे.

CPI के राज्यसभा सांसद संतोष कुमार ने बताया, “मकसद इस आइडिया को कंस्ट्रक्टिव तरीके से हाईलाइट करना है ताकि वोटर्स तक मैसेज जाए. हर व्यक्ति के लिए वोट देने का अधिकार हमारी डेमोक्रेसी का एक बेसिक सिद्धांत है. उस अधिकार की रक्षा होनी चाहिए. विपक्ष ऐसी चिंताओं को उठाकर अपना कर्तव्य निभा रहा है.”

ब्लॉक के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि 30 अक्टूबर को CEC का ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ और उसके बाद 1 नवंबर को SIR के खिलाफ होने वाली रैली से लोगों में जागरूकता आएगी और सरकार पर दबाव पड़ेगा. जॉर्ज ने कहा, “हमें उम्मीद है कि CEC इस्तीफ़ा देकर चले जाएंगे, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्हें हटाना ही एकमात्र रास्ता है. CEC के काम संविधान के मुताबिक नहीं थे. इसलिए, सरकार पर जनता का दबाव डालने के लिए ‘पब्लिक इंपीचमेंट’ किया जाएगा.”

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