रांची: झारखंड सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के युक्तिसंगत पदस्थापन को लेकर संकल्प जारी किया है. नई व्यवस्था के तहत अब प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी की तैनाती प्रखंड और अंचल में पंचायतों की संख्या के आधार पर की जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आम लोगों को सरकारी सेवाओं का बेहतर लाभ मिलेगा.
क्यों पड़ी नई व्यवस्था की जरूरत
सरकार के अनुसार राज्य में कई वर्षों से ऐसी स्थिति बनी हुई थी, जहां एक ही अधिकारी BDO और CO दोनों का दायित्व निभा रहे थे. इससे विकास योजनाओं की निगरानी और राजस्व प्रशासन दोनों प्रभावित हो रहे थे. वहीं कई वरिष्ठ अधिकारी अपनी सेवा श्रेणी से नीचे के पदों पर कार्यरत थे. ऐसे में अधिकारियों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था. इसी समस्या को दूर करने के लिए युक्तिसंगत पदस्थापन की नीति लागू की गई है.
राज्य में कितने प्रखंड और अंचल
झारखंड में वर्तमान में 264 प्रखंड और 268 अंचल हैं. इनमें कई स्थानों पर अलग-अलग अधिकारी तैनात हैं, जबकि कई जगहों पर एक ही अधिकारी दोनों जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं. सरकार ने अब पूरे राज्य की प्रशासनिक जरूरतों का आकलन कर नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है.
12 पंचायत बना नया पैमाना
नई व्यवस्था के तहत 12 या उससे कम पंचायत वाले प्रखंड और अंचल में एक ही अधिकारी BDO और CO दोनों का कार्यभार संभालेंगे. वहीं 12 से अधिक पंचायत वाले बड़े प्रखंडों और अंचलों में दोनों पद अलग-अलग होंगे. यानी वहां स्वतंत्र रूप से BDO और CO की नियुक्ति की जाएगी. सरकार का मानना है कि बड़े क्षेत्रों में अलग-अलग अधिकारियों की तैनाती से प्रशासनिक कामकाज अधिक प्रभावी होगा. राज्य की कुल 271 प्रशासनिक इकाइयों को पंचायतों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया गया है. इनमें से 164 प्रशासनिक इकाइयों में अलग-अलग प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी की तैनाती की जाएगी. वहीं 53 प्रशासनिक इकाइयों में केवल अंचल अधिकारी और 54 प्रशासनिक इकाइयों में केवल प्रखंड विकास पदाधिकारी का एकल पदस्थापन होगा.
विकास और राजस्व कार्यों में आएगी तेजी
अलग-अलग अधिकारियों की तैनाती होने से विकास योजनाओं की निगरानी, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पंचायतों से जुड़े कार्य, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन और दूसरी ओर दाखिल-खारिज, भूमि विवाद, म्यूटेशन, अतिक्रमण, राजस्व वसूली तथा आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों पर अलग-अलग अधिकारी पूरा ध्यान दे सकेंगे. इससे लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है.
वरिष्ठता के अनुसार मिलेगा पद
संकल्प में यह भी स्पष्ट किया गया है कि झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अब उनकी वरिष्ठता, वेतनमान और सेवा संरचना के अनुरूप पदों पर पदस्थापित किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा.
कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी हुआ संकल्प
इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद ने 2 जुलाई 2026 की बैठक में मंजूरी दी थी. इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने विस्तृत संकल्प जारी कर दिया है. संकल्प के साथ उन प्रखंडों और अंचलों की सूची भी जारी की गई है, जहां एकल पदस्थापन होगी और जहां अलग-अलग BDO तथा CO की नियुक्ति की जाएगी.
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी, अधिकारियों पर अनावश्यक कार्यभार कम होगा, विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा और राजस्व प्रशासन भी अधिक प्रभावी बनेगा. इसका सीधा लाभ राज्य की जनता को मिलेगा.
