वोटर आईडी बनवाना अब मुश्किल हो जाएगा? 5 सवाल-जवाब में समझिए- क्या हैं नए नियम


नई दिल्ली:

वोटर आईडी बनवाना अब थोड़ा मुश्किल हो गया है. चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि पहली बार वोटर बनने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले हर व्यक्ति को बताना होगा कि उनके माता-पिता पिछली SIR प्रक्रिया में शामिल थे या नहीं. बिना जानकारी दिए ऑनलाइन फॉर्म भर ही नहीं पाएंगे. 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरा जाता है.

चुनाव आयोग के इस नियम पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि नए वोटरों से माता-पिता का SIR रिकॉर्ड मांगना कोई नई बात नहीं है. बिहार में जब वोटर लिस्ट के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया हुई थी, तब भी वोटरों से माता-पिता का SIR रिकॉर्ड मांगा गया था.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब वोटर आईडी बनवाना मुश्किल हो जाएगा? और क्या होगा कि अगर माता-पिता का नाम पिछले SIR में नहीं था? जानते हैं ऐसे ही 5 अहम सवालों के जवाब.

क्या है फॉर्म-6?

पहली बार वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए जो फॉर्म भरते हैं, उसे ‘फॉर्म-6’ कहते हैं. रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के नियमों में इसका प्रावधान है. यह फॉर्म ऑनलाइन भी भर सकते हैं.

इस फॉर्म को विधानसभा क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) या संसदीय क्षेत्र के ERO को जमा करना होता है. जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं है, वहां भी ERO के पास ही फॉर्म जमा किया जाता है.

फॉर्म के साथ, आवेदक को बर्थ डेट का सबूत देने वाले किसी दस्तावेज की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी भी देनी होती है. इन दस्तावेजों में बर्थ सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं या 12वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट की कॉपी दे सकते हैं.

 

2. अब क्या बदलाव हुआ है?

अब तक ये था कि जो वोटर पिछली SIR प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाए थे, उन्हें वोटर लिस्ट में बने रहने के लिए अपने माता-पिता की SIR की जानकारी देनी पड़ती थी. लेकिन अब चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने वाले नए आवेदकों को भी यह जानकारी देनी होगी.

चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए ‘फॉर्म-6’ भरने वाले नए वोटरों को माता-पिता की SIR जानकारी भी देनी होगी.

इसका मतलब हुआ कि अब जो भी नए वोटर के तौर पर खुद को एनरोल करना चाहते हैं, उन्हें असेंबली सीट नंबर, पोलिंग बूथ नंबर (पार्ट नंबर) और वह सीरियल नंबर देना होगा जिसके तहत उनके माता या पिता का नाम आखिरी SIR में दर्ज था.

 

3. माता-पिता का नाम SIR में नहीं था, फिर?

बिहार को छोड़कर बाकी जिन सभी राज्यों में SIR का काम पूरा हो गया है या चल रहा है तो वहां फॉर्म-6 ऑनलाइन जमा करने की प्रक्रिया में आवेदक को अपने माता-पिता के बारे में नया ‘डिक्लेरेशन फॉर्म’ भरना होगा. अगर आवेदक के माता-पिता पिछली SIR प्रक्रिया में नहीं थे तो उन्हें वह ऑप्शन चुनना होगा और अपने माता-पिता के नाम और EPIC नंबर देना होगा, अगर है तो.

 

4. क्या ये पहली बार हो रहा है?

नहीं. चुनाव आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 के लिए माता-पिता के SIR रिकॉर्ड की जानकारी पहली बार नहीं मांगी जा रही है.

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने  बताया कि पिछले साल बिहार में जब SIR किया गया था, तब नए वोटरों को ‘फॉर्म-6’ के साथ यह डिक्लेरेशन फॉर्म भी भरना होता था. उन्होंने साफ किया कि ‘फॉर्म-6’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

अब अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन ‘फॉर्म-6’ भरता है तो वह तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक कि डिक्लेरेशन फॉर्म न भर दिया जाए.

 

5. ये सब क्यों किया जा रहा है?

चुनाव आयोग के अधिकारी का कहना है कि इससे वोटरों की मैपिंग में मदद मिलती है और नए वोटरों को आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की संख्या भी कम हो जाती है.

आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के साथ-साथ असली आवेदकों के लिए नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए ऐसे उपाय जरूरी हैं. आयोग का तर्क है कि फैमिली बेस्ड वेरिफिकेशन से वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता और मजबूत होगी.

अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि जो लोग तुरंत दस्तावेज नहीं दे पाएंगे, उन्हें नोटिस और सुधार का मौका दिया जाएगा. कोई परेशानी आने पर वोटर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर सकते हैं.

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