सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अक्तूबर) को एक पूर्व जज को झटका देते हुए दो टूक लहजे में कहा है कि उसके सामने सभी नागरिक बराबर हैं। चाहे वो चपरासी हों या चीफ सेक्रेटरी या पूर्व जज ही क्यों न हों? शीर्ष अदालत की ये कठोर टिप्पणी एक पूर्व जिला जज की उस याचिका को खारिज करते हुए आई, जिसमें पूर्व जज ने प्राथमिकता के आधार पर तुरंत सुनवाई का अनुरोध किया था। पूर्व जज ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा अपनी कथित गैर-कानूनी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश देने की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत समानता का अधिकार ऐसे ‘आउट-ऑफ-टर्न’ (सामान्य क्रम से हटकर) हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देता है, सिर्फ़ इसलिए कि याचिकाकर्ता एक पूर्व न्यायिक अधिकारी है। कोर्ट ने कहा, कानून के सामने हर नागरिक किसी की आधिकारिक हैसियत को देखे बिना समान स्तर पर है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “चाहे वह (याचिकाकर्ता) बस का चपरासी हो या राज्य का प्रधान सचिव, इससे अदालत को कोई फ़र्क नहीं पड़ता। सभी को न्याय पाने का समान अधिकार है। इसलिए, संवैधानिक समानता के इस दायरे में, हम व्यक्तिगत आधार पर हस्तक्षेप नहीं करेंगे।”
मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष लंबित
पूर्व जिला जज के वकील ने आज शीर्ष अदालत को बताया कि मामलों के भारी बोझ के कारण, हाई कोर्ट ने अभी तक उनकी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका पर कोई फैसला नहीं किया है। इसलिए हाई कोर्ट को उनके मामले की जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया जाए। वकील ने कहा, “मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष लंबित है, जिस पर मामलों का बोझ है, और इसमें समय लग रहा है।”
SC ने खारिज कर दी अर्जी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हाई कोर्ट को पूर्व जज की याचिका को प्राथमिकता के आधार पर लिस्ट करने का निर्देश देता है, तो यह अन्य याचिकाकर्ताओं के साथ अन्याय होगा। कोर्ट ने शुरू में संकेत दिया था कि जिला जज की याचिका पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा आगे विचार किया जा सकता है, जो आज कोर्ट में नहीं बैठ सके। बावजूद इसके, जब याचिकाकर्ता के वकील ने जल्द राहत के लिए जोर दिया तो कोर्ट ने याचिका को खारिज करने का फैसला किया।
जस्टिस बागची ने कहा, “चूंकि आप इस पर जोर दे रहे हैं, इसलिए हम इसे खारिज कर देंगे। (आप हमसे) ऐसा आदेश पारित करने के लिए कह रहे हैं जो हमारे सामने मौजूद याचिकाकर्ता के लिए तो उचित हो, लेकिन उन बहुत सारे याचिकाकर्ताओं के लिए अनुचित हो जो हमारे सामने नहीं हैं। इसलिए हम ऐसा आदेश पारित नहीं करेंगे। इसमें कोई भी तथ्य मदद नहीं करेगा।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व ज़िला जज के प्रति सहानुभूतिपूर्ण विचार उन अनगिनत अन्य याचिकाकर्ताओं की कीमत पर नहीं हो सकता जो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
