लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक नवंबर को इंडिया गठबंधन द्वारा बुलाई गई महारैली से पहले राष्ट्रीय राजधानी में कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, ”एक नवंबर को दोपहर 12 बजे मार्च शुरू होगा। यह मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के जंक्शन से शुरू होगा और रामलीला मैदान तक हम सब मिलकर चलेंगे।” कांग्रेस नेता ने लोगों से बड़ी संख्या में ‘इंडिया’ गठबंधन के इस मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी दलों का गठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त आयुक्त ज्ञानेश कुमार और ”वोट चोरी” के खिलाफ एक नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च निकालेगा। राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर लोगों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की। विपक्षी गठबंधन ने इस मार्च को ‘चलो दिल्ली’ नाम दिया है। इस मार्च के बाद रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली होगी।
भाजपा ने भी बुलाया पैदल मार्च
अब इस मार्च के जवाब में केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी उसी दिन मार्च का ऐलान किया है। IANS के मुताबिक, बीजेपी ने 1 नवंबर को दिल्ली के तिलक नगर से हरि नगर तक पैदल मार्च निकालने की योजना बनाई है। इसमें लगभग 5,000 लोग शामिल होंगे, जिसमें 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ित और उनके परिवार भी शामिल हैं। इसमें बीजेपी के प्रमुख सिख नेताओं और पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, यह मार्च सुबह 11:00 बजे शुरू होगा। इस मार्च में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल होंगे।
भाजपा अचानक क्यों कूदी?
दरअसल, भाजपा ने पंजाब चुनावों को ध्यान में रखते हुए ये योजना बनाई है, जिसके केंद्र में सिख वोटर हैं। 1 नवंबर वही तारीख है, जब 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख दंगे भड़के थे। उन दंगों में तिलक नगर और हरिनगर का इलाका जल रहा था। बड़े पैमाने पर इस इलाके में रहने वाले सिखों की हत्या कर दी गई थी। इसके दाग कांग्रेस के नेताओं खासकर सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर पर लगे थे, जो तब के पीएम राजीव गांधी के करीबी माने जाते थे। भाजपा इस रैली के जरिए सिखों के प्रति एकजुटता का भाव दिखाना चाहती है।
