जमशेदपुर। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल एमजीएम अस्पताल, डिमना-मानगो की बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच अस्पताल परिसर की बदहाल व्यवस्था सवाल खड़े कर रही है। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए अस्पताल के बाहर इन दिनों गंदगी और अव्यवस्थित पार्किंग की समस्या मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल आने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर पार्किंग के लिए स्थान उपलब्ध होने के बावजूद वहां साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। पूरा पार्किंग क्षेत्र गंदगी और कचरे से भरा नजर आता है। बारिश होने पर स्थिति और खराब हो जाती है। पार्किंग परिसर में जलजमाव और कीचड़ के कारण वहां वाहन खड़ा करना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन मरीजों और उनके परिजनों के साथ आने वाले छोटे-बड़े वाहन पार्किंग में खड़े करने के बजाय सड़क के किनारे लगाने को मजबूर हैं। इससे अस्पताल के बाहर यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज को देखने एमजीएम अस्पताल पहुंचे थे, हालांकि, जिस मरीज को देखने के लिए वह अस्पताल पहुंचे थे, उसकी मौत हो गई। इस दौरान अस्पताल के बाहर पार्किंग क्षेत्र में फैली गंदगी और अव्यवस्था को देखकर अर्जुन मुंडा नाराज नजर आए।
उन्होंने अस्पताल परिसर के बाहर की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और एक्स पर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के बाहर इस तरह की गंदगी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और इसकी जवाबदेही किसकी है।
मरीजों के स्वास्थ्य पर भी खतरा
एमजीएम अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल के बाहर गंदगी का इस तरह जमा रहना केवल सौंदर्य और व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ा हुआ है। अस्पताल जैसे स्थान पर कचरा, गंदा पानी और कीचड़ संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा सकते हैं।
मरीजों के साथ आने वाले लोगों का कहना है कि अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज पहले ही बीमारी और परेशानी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और पार्किंग क्षेत्र में गंदगी का सामना करना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
400 करोड़ की परियोजना, फिर भी मूलभूत व्यवस्था बदहाल
एमजीएम अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि अस्पताल के बाहर पार्किंग, जल निकासी व साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं ठीक नहीं हैं तो यह व्यवस्था की निगरानी और रखरखाव पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभाग को पार्किंग क्षेत्र की नियमित सफाई, कचरा उठाव और बारिश के पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही वाहनों के व्यवस्थित आवागमन और पार्किंग के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
अस्पताल के बाहर गंदगी की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल यह है कि इस क्षेत्र की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की है। यदि नियमित रूप से सफाई की जिम्मेदारी तय है तो उसके बावजूद पार्किंग क्षेत्र में गंदगी का अंबार क्यों लगा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद उम्मीद है कि संबंधित विभाग और अस्पताल प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करेगा। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ अस्पताल के बाहर साफ सफाई की व्यवस्था कराएगा। वहीं अब यह भी देखना है कि पूर्व मुख्यमंत्री के सवाल के बाद अस्पताल परिसर के बाहर फैली गंदगी और बदहाल पार्किंग व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभाग कब तक ठोस कदम उठाता है।
