शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति होनी चाहिए. यह प्रदर्शन “रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन” नाम के एक इंस्टाग्राम पेज के आह्वान पर किया गया था, जिसने लोगों से जंतर-मंतर पर जाकर विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी.
प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई
पुलिस ने बताया कि इस प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी. इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था; पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को अहम जगहों पर तैनात किया गया और प्रदर्शन स्थल के चारों ओर बैरिकेड्स लगाए गए. प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर पुरुष थे. ये अपने साथ बैनर, पोस्टर और केसरिया झंडे लेकर पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए.
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी माग है कि सरकारी मदद की जरूरत किसे है, यह तय करते समय आर्थिक स्थिति पर विचार किया जाना चाहिए. जाति से परे, किसी भी गरीब व्यक्ति को शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए मदद मिलनी चाहिए.”
‘मौजूदा व्यवस्था की जांच हो’
एक और प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा चाहते हैं, क्योंकि उनका तर्क है कि इसके फायदे हमेशा सबसे पिछड़े वर्गों तक नहीं पहुंच पाते. उन्होंने कहा, “हम कई सालों से यह मुद्दा उठा रहे हैं. हमारा कहना है कि सरकार को यह जांच करनी चाहिए कि क्या मौजूदा व्यवस्था अपने मकसद को पूरा कर रही है और क्या फायदे जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहे हैं.”
कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में “क्रीमी-लेयर” का नियम लागू करने और अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़ी नीतियों में बदलाव की मांग भी की. एक और प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बिना मदद के छोड़ दिया जाए. हमारा कहना है कि मदद उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए जिन्हें इसकी जरूरत है, जैसे स्कॉलरशिप, फीस में मदद और कोचिंग के जरिए.”
खूब हुई नारेबाजी
‘आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए हो आरक्षण’
एक प्रतिभागी ने आरक्षण लागू होने के कई दशकों बाद भी इसके प्रावधानों के जारी रहने पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार को आज के सामाजिक और आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए इस नीति की समीक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दशकों में हालात काफी बदल गए हैं. इस बात पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए कि क्या मौजूदा ढांचे की समीक्षा की जरूरत है और बिना भेदभाव के आर्थिक रूप से पिछड़ेपन की समस्या को कैसे दूर किया जा सकता है.”
प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और उच्च शिक्षा नीतियों (जिसमें यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन – UGC का फ्रेमवर्क भी शामिल है) से जुड़े मुद्दे भी उठाए. पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुबह जो लोग वहां जमा हुए थे, उन्हें हटा दिया गया क्योंकि प्रदर्शन करने की कोई अनुमति नहीं ली गई थी.उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी उस इलाके की ओर जाने वाले लोगों की जांच भी कर रहे थे. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उस जगह के आस-पास इंटरनेट जैमर लगाए गए थे, जिससे उस इलाके से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना मुश्किल हो रहा था. इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी.
