रांची: केंद्र सरकार द्वारा खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को झारखंड के हितों के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है. 27 अगस्त से झारखंड कांग्रेस का चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा. पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सांसद सुखदेव भगत, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि झारखंड कांग्रेस, केंद्र की मोदी सरकार का मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं करेगी.
संवाददाता सम्मेलन में सुखदेव भगत और केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड में कांग्रेस एमएमडीआर संशोधन बिल एवं चंदा चोरी के खिलाफ प्रखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक व्यापक संघर्ष करेगी.
27 अगस्त से कांग्रेस का राज्यव्यापी आंदोलन: केशव महतो कमलेश
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि एमएमडीआर संशोधन बिल के माध्यम से राज्य के खनिज पर सेस वसूलने का अधिकार खत्म करने के केंद्र सरकार के फरमान के विरोध में 27 अगस्त से कांग्रेस राज्यव्यापी आंदोलन करेगी.
27 अगस्त को जिला मुख्यालय में एकदिवसीय धरना दिया जाएगा और राष्ट्रपति के नाम मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा. 7 सितंबर को राज्य स्तरीय धरना, लोक भवन के समक्ष दिया जाएगा एवं 9 से 16 सितंबर के बीच सभी प्रखंड मुख्यालय में धरना दिया जाएगा. आगामी कार्यक्रमों की घोषणा 16 सितंबर के बाद प्रखंड स्तरीय धरना समाप्त होने के बाद की जाएगी.
प्रखंड स्तर तक कांग्रेस लेकर जाएगी चंदा चोरी का मुद्दा
केशव महतो कमलेश ने बताया कि MMDR संशोधन बिल से होने वाले झारखंड को नुकसान और राम मंदिर में चंदा चोरी प्रकरण को प्रखंड स्तर तक ले जाकर जनता को बीजेपी की सच्चाई बताई जाएगी. 2024-25 में खनिज से झारखंड को 1380 करोड़ तथा 25-26 में 7487.91 करोड़ मिला था, इससे कई योजनाओं की प्रगति में राज्य को वित्तीय सहायता मिली थी. खनिजों पर सेस हटाने से कई जनकल्याणकारी योजनाओं पर प्रभाव पड़ेगा.
स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, पेंशन और मंईयां योजना जैसी योजनाएं प्रभावित होगी. हमारी सरकार भी इस मामले पर गंभीर है. उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है.झारखंड के हितों के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश केंद्र सरकार कर रही है.
खान एवं खनिज से प्रदूषण और विस्थापन हम झेलें और निर्देश केंद्र दें, नहीं चलेगा: सुखदेव भगत
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि खनिज झारखंड का है, प्रदूषण और विस्थापन का दर्द झारखंड के लोग झेले और निर्देश केंद्र की सरकार के हो, ऐसा किसी भी कीमत पर नहीं चलेगा. हमारा सवाल है कि सेस लगाने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने दिया था, क्या मोदी सरकार सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर है, जो सेस लगाने के अधिकार को रोक रही है.
