
जमशेदपुर, 11 सितंबर। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में एक महिला उद्यमी की जमीन पर कब्जा दिलाने की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ लेती दिखाई दे रही है। जियाडा के संयुक्त निदेशक प्रेम रंजन ने महिला आवंटी को भूखंड पर दखल-कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पुनः शुरू कर दी है। इससे उस कथित सफेदपोश उद्योग माफिया के लिए झटका माना जा रहा है, जिसके प्रभाव को लेकर लंबे समय से औद्योगिक क्षेत्र में चर्चाएं होती रही हैं।
*2006 में हुआ था भूखंड का आवंटन*
मेसर्स टाटानगर इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2006 में आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के फेज-3 में उद्योग लगाने के लिए 30 हजार वर्गफुट भूखंड आवंटित किया गया था। कंपनी की महिला निदेशक का आरोप है कि लगातार तरह-तरह के अवरोध खड़े कर उन्हें अपने आवंटित भूखंड पर कब्जा लेने से रोका गया।
*भूखंड के चारों ओर वृक्षारोपण का आरोप*
महिला निदेशक के अनुसार, उनके आवंटित भूखंड के चारों ओर वृक्षारोपण कराने के साथ वहां अपने नाम का केज भी लगवाया गया। उनका आरोप है कि भूखंड के भीतर नाला भी कटवाया गया, जिससे आवंटित जमीन पर वास्तविक कब्जा लेने में बाधा उत्पन्न हुई।
*महिला की आवाज से टूटा कथित खौफ*
औद्योगिक क्षेत्र में प्रभावशाली माने जाने वाले इस सफेदपोश और संघ से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ उद्यमियों की कथित चुप्पी के बीच महिला निदेशक ने खुलकर आवाज उठाई। अब जियाडा और जिला प्रशासन की सक्रियता के संकेत मिलने से अन्य दबे उद्यमियों के भी सामने आने की संभावना बढ़ गई है।
*खेल मैदान को लेकर ग्रामीणों में भ्रम?*
बताया जाता है कि भूखंड के आसपास के ग्रामीणों को यह कहकर विरोध के लिए प्रेरित किया जाता रहा कि यहां उद्योग लगने से खेल मैदान खत्म हो जाएगा। दूसरी ओर, जियाडा की ओर से ग्रामीणों को कथित रूप से स्पष्ट किया गया है कि 30 हजार वर्गफुट भूखंड के बाहर स्थित खेल मैदान यथावत रहेगा और उसके बाद वहां किसी अन्य उद्योग को जमीन आवंटित नहीं की जाएगी।
*प्रदूषण के मुद्दे पर भी उठ रहे सवाल*
रिपोर्ट के अनुसार, कथित माफिया का प्लांट महिला की कंपनी के आवंटित भूखंड के समीप है। आसपास प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों की चिंता का भी उल्लेख किया जा रहा है। महिला पक्ष का आरोप है कि अपने प्लांट से जुड़े कथित प्रदूषण के मुद्दे को दबाए रखने के लिए आवंटित भूखंड पर महिला की कंपनी को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
*प्रशासन से सशस्त्र बल की मांग की तैयारी*
सूत्रों के अनुसार, जियाडा की ओर से सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन और पुलिस से दखल-कब्जा की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सशस्त्र पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि जियाडा एमडी वरुण रंजन ने भी मामले में कड़ा रुख अपनाने के निर्देश दिए हैं।
*खबर के बाद तत्काल संज्ञान*
न्यू इस्पात मेल के 10 सितंबर के अंक में “आदित्यपुर के उद्योगों को निगल रहा माफिया… वरुण रंजन से महिला ने लगाई गुहार” शीर्षक से प्रकाशित समाचार के बाद जियाडा के एमडी और ज्वाइंट डायरेक्टर द्वारा मामले पर तत्काल संज्ञान लिए जाने की बात सामने आई है।
*क्या टूट रहा है प्रभाव का तिलिस्म?*
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासनिक सक्रियता से उस कथित प्रभाव का तिलिस्म टूट रहा है, जिसके कारण औद्योगिक क्षेत्र के छोटे उद्यमी लंबे समय से आवाज उठाने से बचते रहे? एसिया और संघ संपोषित लघु उद्योग भारती जैसे उद्यमी संगठनों में प्रभाव को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में छोटे उद्यमियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संगठनात्मक मंचों का इस्तेमाल व्यक्तिगत कारोबारी प्रभाव बढ़ाने के लिए किया गया? इसका असर नए उद्यमियों को भूखंड मिलने और मौजूदा उद्योगों के संचालन तक पर पड़ रहा है। बड़ी मछली छोटी मछलियों को निगलती जा रही।
*एंटरप्रेन्योर कॉलोनी का प्रस्ताव कहां गायब हुआ?*
अब इस पूरे प्रकरण की अगली कड़ी उस प्रस्ताव तक पहुंचती है, जिसे उद्यमियों के हित में एंटरप्रेन्योर कॉलोनी के रूप में सामने लाया गया था। आखिर यह प्रस्ताव कब और कैसे अस्तित्व से गायब हुआ? किसके हित प्रभावित हुए और किसे फायदा मिला?
आगे जारी…
