रांची में धरना के लिए AISA का अलग मंच
‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ और ‘जेपीएससी-जेएसएससी कैंडिडेट्स फोरम’ 25 जुलाई से ही स्टेडियम में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, आइसा के नेताओं ने कहा कि उनके मंच को किसी अलग गुट के तौर पर नहीं, बल्कि स्टेडियम में जारी आंदोलन के ही एक हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए।आइसा के रांची अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा, ‘हम भले ही अलग-अलग मंच से लड़ रहे हों, लेकिन हमारी मांगें एक ही हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जवाबदेही तय करना शामिल है।’ उन्होंने कहा कि आइसा के सदस्य 10 अगस्त को बड़े समूह के विरोध मार्च में शामिल होंगे, लेकिन वे संगठन का बैनर साथ नहीं ले जाएंगे।
हम भले ही अलग-अलग मंच से लड़ रहे हों, लेकिन हमारी मांगें एक ही हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जवाबदेही तय करना शामिल है।
रांची में नेहा बोरा पर फेंकी गई थी स्याही
विजय कुमार ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि आंदोलन किसी भी तरह से कमजोर पड़े। हम सभी एक मकसद के लिए लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे।’ ये पूछे जाने पर कि क्या कोई छात्र भूख हड़ताल करेगा, उन्होंने कहा कि इस बारे में बाद में फैसला लिया जाएगा। वामपंथी विचारधारा वाले दो छात्र संगठनों आइसा और ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन’ (एआईएसएफ) ने प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों के समर्थन में शुक्रवार को झारखंड विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला था।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध-प्रदर्शन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहे, जब राज्य सरकार और पांच छात्र संगठनों के बीच बातचीत में गतिरोध खत्म नहीं हो सका। प्रदर्शनकारी छात्रों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार रविवार तक उनकी मांगें पूरी नहीं करती है, तो वे 10 अगस्त को विधानसभा की ओर मार्च करेंगे।
जेपीएससी एग्जाम की सीबीआई जांच की मांग
प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों (उच्च न्यायालय के) के एक पैनल से स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं।वे झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधार की मांग भी कर रहे हैं।
