स्क्रैप कारोबार के खेल में सफेदपोश कहीं बदनाम न कर दे देश में एथिक्स वाली सबसे बड़ी स्टील कंपनी को* *कार्बन फूटप्रिंट कम करने के नाम पर स्क्रैप खरीद नीति भी चर्चे में*
जमशेदपुर: स्क्रैप कारोबार में सरताज माने जाने वाले ज्ञान चंद उर्फ बबलू जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद आदित्यपुर स्क्रैप माफिया के स्क्रैप की नकदी लेन-देन और जी एस टी की चोरी कब पकड़ में आएगी, यह सवाल खड़ा होता है। सवाल यह भी खड़ा होता है कि माफिया के चक्कर में देश की उस नामी स्टील कंपनी का भी नाम कहीं खराब न हो जाय जिसको आजकल यह माफिया स्क्रैप की बिक्री कर रहा है । फ्लैट प्रोडक्ट का काम भी करने लगा है।कार्बन उत्सर्जन रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए यह कंपनी अपना अलग स्थान रखती है। एथिक्स को सर्वोपरि रखते हुए यह स्टील कंपनी काम करती है जिसके संस्थापक की सब भगवान जैसी पूजा करते हैं। बबलू जायसवाल पहले यहां स्क्रैप देते थे जिन्हें ब्लैक लिस्ट होने पर माफिया ने अपनी पैठ बनायी।
पता चला है कि आदित्यपुर में जितने छोटे मशीनिंग और ऑटो उत्पाद वाले कारखाने हैं उनको इस माफिया ने सूद पर कर्ज देकर बांध रखा है और उसके एवज में उन कारखानों को अपना सारा स्क्रैप उसको देना होता है। इनके अलावा भी तरह तरह के हथकंडों द्वारा कारखानों से स्क्रैप लेने के उपाय करता है यह माफिया। जो नहीं दे उसके प्लांट में पत्थरबाजी, चोरी कराना आम बात है। चावला मोड़ पर बाकायदा गुर्गों को तैनात रखता है जो दूसरे स्क्रैप खरीदारों की गाड़ियों को रोक देने, पलटी करा देने तक की हिमाकत करते हैं।
उल्लेखनीय है कि एसिया और लघु उद्योग भारती को पॉकेट में डालने के कारण भी सदस्य उद्यमियों पर दबदबा बना देता है। सूद पर पैसों और औद्योगिक संगठनों पर एकाधिकार जमा लेने के कारण छोटे कारखानों को इस सफेदपोश का पिछलग्गू बनना पड़ता है। ज्ञान चंद जायसवाल भी पूर्व में लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी रहे जिन्हें इसी सफेदपोश ने हटवाया। स्क्रैप कारोबार में वही इसे चुनौती दे सकते थे। इसिलिये जायसवाल को स्टील कंपनी में ब्लैक लिस्ट कराने-फँसाने में इस माफिया का भी हाथ माना जाता है।
कैश के स्क्रैप से जीएसटी की चोरी तक कौन खोलेगा कारोबार की कुंडली?
स्क्रैप पर कब्जे का खेल, छोटे कारखाने दबाव में
*मोनोपली पर सवाल, स्टील कंपनी की खरीद नीति भी जांच के घेरे में*
*सूद के शिकंजे से स्क्रैप तक**चावला मोड़ पर स्क्रैप नेटवर्क की पड़ताल जरूरी*
*स्क्रैप के नकद धंधे और जीएसटी जांच हुई तो खुलेंगे कितने राज?*
*उद्योग संगठनों पर प्रभाव से स्क्रैप कारोबार तक सफेदपोश दबदबे पर सवाल*
खैर, स्क्रैप का धंधा कैश में कर किस प्रकार जी एस टी की अदायगी छिपाई जाती है और किस तरह कागज तैयार करा कर उस स्क्रैप को उक्त स्टील कंपनी सहित अन्य जगहों पर खपाया जाता है, इसकी जांच जी एस टी के अधिकारी करना शुरू करें तो ज्ञानचन्द से कम बड़े मामले का खुलासा नहीं होगा। स्टील कंपनी के अधिकारियों के लिए भी यह घटना सावधानी की घंटी है, क्योंकि जांच होने पर उन पर भी आंच आ जाय तो कोई आश्चर्य नहीं, क्योंकि स्क्रैप खरीदारी की मोनोपली उस स्टील कंपनी के अधिकारियों ने इस माफिया की कंपनी को किन परिस्थितियों में और किसके प्रभाव में दिया ? जमशेदपुर में कोई भी दूसरा स्क्रैप कारोबारी उस स्टील कंपनी को अपना स्क्रैप नहीं बेच सकता। इस प्रकार स्क्रैप कारोबार पर भी इस माफिया ने कब्जा कर लिया है। यह सब सांसद की लॉबिंग का फल बताया जाता है जो इन दिनों तनातनी के संबंधों को लेकर चर्चा में है।.जारी …
