बीजीआर और इंडियन बुल कंपनी के लापरवाह रवैए से ग्रामीण नाराज
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दुमका – उपराजधानी दुमका के रेलवे स्टेशन पर बने कोयला डंपिंग यार्ड में बीती रात एक रोलर ने मजदूर को धक्का मार दिया जिससे कि उसकी मौत हो गई। मृतक मंतोष खिरहर के साथ उसका पुत्र अमितोष खिरहर भी था जो कि इस घटना में बाल बाल बच गया। इस तरह एक पुत्र के सामने ही उसके पिता की जान चली गई। गौरतलब है कि मृतक मंतोष बीजीआर कंपनी के कोयला साइडिंग में गार्ड था। जामा प्रखंड के तारा जोड़ा का रहने वाला मंतोष अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्री और एक पुत्र को पीछे छोड़ गया है।
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कंपनी के रवैए से ग्रामीण हुए नाराज, आठ घंटे से कोयला साइडिंग पर आवागमन ठप
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इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन उचित मुआवजा और नौकरी देने की मांग पर अड़े रहे। समाचार लिखे जाने तक कोयला बीच सड़क पर शव रखकर ग्रामीण जाम किया हुआ था। यहां बताते चलें कि मुआवजा देने की बात पर कंपनी के प्रतिनिधि उचित निर्णय पर नहीं पहुंच पा रहे थे। जैसे जैसे समय बीत रहा था ग्रामीणों का ग़ुस्सा बढ़ता जा रहा था।
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मुफस्सिल थाना प्रभारी के प्रयास के बावजूद थाना में नहीं बनी बात। जिससे कि मृतक मंतोष का शव पड़ा रहा जिस पर कंपनी के प्रतिनिधियों को जरा भी दया नहीं आई। यह हाल तब है जब मृतक वहां काम कर रहा था। तो जरा सोचिए कि कंपनी के नजर में आम आदमी की की कीमत क्या है। इधर घटना की सूचना मिलते ही राजद नेता अमरेन्द्र कुमार यादव, कांग्रेस के पोड़ैयाहाट विधानसभा प्रभारी महेश राम चंद्रवंशी मौके पर पहुंचे और परिजनों की मांग का समर्थन किया।
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दस घंटे कोयला गाड़ी आवागमन ठप होने के बाद बनी सहमति
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नाराज ग्रामीणों के उग्र तेवर को देखते हुए देर शाम कंपनी के प्रतिनिधियों ने मामले को गंभीरता से लिया तब जाकर बात बनी। परिजनों और प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद आठ लाख रूपए और एक नौकरी देने पर फैसला हुआ। तब जाकर कोयला का आवागमन शुरू किया गया।
