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*सांसद से तनातनी — 15*
*जियाडा एमडी वरुण रंजन या विधायक सरयू राय सबसे महिला की यही पुकार- करो माफिया से मेरा बचाव* जमशेदपुर, 10सितंबर।संघ से जुड़े सफेदपोश उद्यमी – स्क्रैप माफिया से त्रस्त महिला ने आज जियाडा के एम डी वरुण रंजन, आई ए एस को मेल भेज कर आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित प्लॉट पर कब्जा दिलाने की मांग की। विदित हो टाटानगर इंटरप्राइजेज प्र लि को फेज 3 में 30 हजार वर्ग फीट भूखंड का आवंटन तत्कालीन आयडा ने 2006 में किया, लेकिन 20 साल गुजर जाने के बावजूद उसे दखल नहीं दिलाया। दखल नहीं होने के पीछे उक्त सफेदपोश की प्रत्यक्ष सांसद- साझेदारी शक्ति काम कर रही थी। टाटा नगर इंटरप्राइजेज की निदेशक उक्त महिला ने पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि उक्त माफिया और संघ के ‘शक्तिमान ‘ ने उनके प्लॉट पर पौधे लगा दिए और नाला कटवा दिया।
अब कहता है पौधा वन एवं पर्यावरण विभाग ने लगाया लेकिन शायद भूल गया कि उन पौधों की रक्षा के लिए चारों ओर जालीनुमा केज भी लगाया गया है जिस पर उसकी फैक्ट्री का नाम लिखा हुआ है। आमतौर पर दखल दिहानी दिखाने के लिए लोग सरकारी या दूसरों की जमीन पर इसी तरह पेड़ लगा कर अपना दावा प्रस्तुत करते हैं। क्या वन एवं पर्यावरण विभाग भी इस माफिया की मु_ी में है जो कहीं वृक्षारोपण कर उसकी फैक्ट्री का नाम लिखा प्ले कार्ड टांग दे ? अगर वन विभाग ने पौधे लगाए तब नाला क्या नगर निगम ने जमीन काट कर निकाल दिया वहां दूसरे की आवंटित जमीन पर ? यह है इस सफेदपोश की माफियागिरी का नमूना। टाटानगर इंटरप्राइजेज की उक्त निदेशक ने ताजा ताजा विधायक सरयू राय और झामुमो नेता कुणाल सारंगी को भी दखल दिलाने में पहल और सहयोग मांगा है। जियाडा एम डी क्या कारवाई करते हैं, इस पर औद्योगिक क्षेत्र के लोगों की निगाह है. यह व्यक्ति खुद को इतना शक्तिशाली समझता है कि औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी कुछ नहीं बोलते। उद्यमियों के संगठन को दलाली का मंच बना कर रख दिया गया है। कांग्रेस में कहा जाता था खाता न बही, केसरी जो कहें वही सकी। इसी तरह उद्योगों के पित्त संगठन में यह माफिया जो कहे वही सही तोता है। बिना संविधान के एक बार इसी ने एक उद्यमी को कार्यसमिति सदस्य बनाया। इसे बाद में निगल लिया। उसी तरह एक व्यक्ति को ट्रस्टी बना दिया जिसके पास कोई उद्योग नहीं है।
पहले टाटा मोटर्स की ओर से आदित्यपुर की अनुषांगिक इकाइयों के लिए एक नियमित अंतराल पर संगठन के कार्यालय में उसके अधिकारी आकर बैठक करते थे और उद्यमियों से चर्चा कर उनके उत्थान का प्रयास करते थे। इससे सभी उद्यमी लाभान्वित होते थे। अब टाटा मोटर्स ने यह परंपरा बंद कर दी और अपने यहां सिर्फ सप्लायर उद्योगों की बैठक करते हैं। यानी संगठन यहां नतमस्तक। इसका आम उद्यमियों पर एक निराशाजनक असर यह पड़ा कि टाटा मोटर्स के अधिकारी जब संगठन के कार्यालय में आकर बैठते तब टाटा मोटर्स की गैर अनुषांगिक इकाइयों का भी उनके साथ आमना सामना होता था जिससे उनके विकास का मार्ग खुलता था। अब सिर्फ उनलोगों को मौका मिलता है जो टाटा मोटर्स के सप्लायर होते हैं। जमीनी सचाई यह है कि माफिया ने सभी अनुषांगिक इकाइयों पर येन केन प्रकरण मोनोपली कायम कर ली है। वह फाउंड्री किंग बन कर राज कर रहा। ऊपर से संघ का पदाधिकारी होकर अलग से हवा बनाता है। सांसद से पार्टनरशिप बच्चे बच्चे की जुबान पर थी जो इन दिनों दरक कर तनातनी का रूप ली हुई है। संघ से जुड़ा होने पर लोगों को आपत्ति नहीं लेकिन माफियागिरी चलाने और संघ के चुप्पी साधे रहने पर तरह तरह की चर्चा होती है जो लगातार अखबार में छप रहा। यह माफिया यह प्रचार करवाता है कि संघ की गतिविधियों का खर्च उठाता है….(जारी)
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