जेपी चोपड़ा की स्मृति में होने वाला रक्तदान शिविर क्यों बंद हुआ?
आदित्यपुर : आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कभी उद्यमी स्व. जेपी चोपड़ा की स्मृति में एसिया भवन में आयोजित होने वाला वार्षिक रक्तदान शिविर अपने विराट स्वरूप और सामाजिक सरोकार के लिए चर्चित था। बताया जाता है कि इस शिविर में 500 से 700 यूनिट तक रक्त संग्रह होता था। आज अर्पण, टाटा मोटर्स यूनियन, कोशिश एक मुस्कान समेत कई संस्थाएं बड़े पैमाने पर रक्तदान शिविर आयोजित कर रही हैं, लेकिन एसिया की वह पुरानी परंपरा अब दिखाई नहीं देती। इसे लेकर उद्यमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह महादान बंद क्यों हुआ?
इसी बहाने एसिया के गठन और औद्योगिक हितों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वरिष्ठ उद्यमी गुरुदास राय की उपेक्षा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि संगठन के पुराने संघर्ष, परंपराएं और सामाजिक सरोकार आज प्राथमिकता से बाहर होते जा रहे हैं।
आलोचकों का आरोप है कि संगठन को सफेदपोश स्क्रैप माफिया ने उद्योगों की सामूहिक समस्याओं के बजाय व्यक्तिगत हितों और अधिकारियों-राजनेताओं से नजदीकी बढ़ाने का मंच बना दिया है। जियाडा की भूमि आवंटन संबंधी बैठकों में सक्रियता और औद्योगिक भूखंडों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। बड़े औद्योगिक भूखंड में गाय पालने और गौशाला खोलने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं जबकि उद्योगों के लिए प्लॉट नहीं मिलते। उल्लेखनीय है कि कोका कोला वाले प्लॉट में सफेदपोश की गायें बांधी जा रहीं।
सवाल यह है कि जिस संगठन की स्थापना उद्यमियों के सामूहिक हितों और औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए हुई थी, क्या उसका नेतृत्व आज भी उसी मूल भावना के अनुरूप हो रहा है? उद्यमी वर्ग अब इस पर स्पष्ट जवाब चाहता है। श्री बाबू ने काफी दूरदर्शिता प्रदर्शित करते हुए एशिया के सबसे बड़े इस औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना करायी थी। ओडिशा की सीमा से बाहर निकालने और बिहार में बनाए रखने के लिए उन्हें काफी पापड़ बेलना पड़ा था। अफसोस है आज बिहारियों को बिहारियों से ही लड़ा कर उन्हें आउट करा दिया इस सफेदपोश ने। आज नामलेवा लोग ही बचे हैं। आश्चर्य है जहां हजारों उद्योगों और लाखों मजदूरों के हित और रोजी रोटी का सवाल हो वहां एसिया, लघु भारती जैसे संगठनों की कमान कुशल और उदारचित्त व्यक्तियों के पास होनी चाहिए वहां सफेदपोश स्क्रैप माफिया इस पर काबिज हो गया है जिसका एकमात्र मकसद अपनी गोटी लाल करना है। तभी तो सबके हितों को साधने के बजाय तिकड़म के सहारे और अधिकारियों के स्वागत सत्कार के बहाने अपना मकसद साधना एक मात्र उद्देश्य दिखता है। क्या कभी किसी ने सोचा है आज झारखंड में झामुमो की बहुमत वाली सरकार है लेकिन जियाडा के अधीन आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में इस सफेदपोश की ही चल रही जो आर एस एस का एक प्रमुख वाहक होता है ? जारी …….
