झारखंड की कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की इन दिनों कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में है, जहां उन्होंने शुक्रवार को रक्षाबंधन के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को राखी बांधी और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण और स्नेहपूर्ण माहौल में मुलाकात हुई और उन्होंने एक-दूसरे के साथ त्योहार की बधाई का आदान-प्रदान भी किया।
इस बारे में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जानकारी देते हुए बताया, ‘कर्नाटक के माननीय मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जी को राखी बांधकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। इस पावन अवसर पर उनसे आत्मीय मुलाकात हुई और भाई-बहन के स्नेह, विश्वास एवं सम्मान के इस रिश्ते को और मजबूत करने का सौभाग्य मिला। उन पर मां कामाख्या की असीम कृपा सदैव बनी रहे और उनका जीवन सुख, समृद्धि एवं सफलता से परिपूर्ण रहे।’
राखी के बदले शिवकुमार ने दिया शगुन
शिल्पी नेहा तिर्की ने जब सीएम डीके शिवकुमार को राखी बांधी तो बदले में उन्होंने भी परंपरा का निर्वहन करते हुए झारखंड की मंत्री को शगुन के रूप में कुछ पैसे दिए। हालांकि उन्होंने नेहा तिर्की को कितनी रकम दी इसका पता तो नहीं चल सका है, लेकिन शिल्पी ने जो फोटोज जारी किए हैं, उसमें शिवकुमार उन्हें दो से ज्यादा की संख्या में नोट देते हुए दिखाई दे रहे हैं।
गृहमंत्री खरगे से भी मिलीं शिल्पी तिर्की
इस मौके पर मंत्री तिर्की ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से भी मुलाकात की और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। मुलाकातों के दौरान राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा हुई, साथ ही झारखंड में कृषि, पशुपालन और सहकारिता क्षेत्रों के विकास पर विस्तार से बातचीत की गई।
राज्य के विकास को लेकर की चर्चा
इस मुलाकात के दौरान शिल्पी ने कृषि और पशुपालन के क्षेत्रों में कर्नाटक और झारखंड के बीच तकनीकी सहयोग की संभावनाओं, किसानों के लिए नई तकनीकों के आदान-प्रदान, पशुधन प्रबंधन, दूध उत्पादन और प्रसंस्करण, सहकारी मॉडल, कृषि प्रसंस्करण और किसानों की आय बढ़ाने के बारे में विस्तृत चर्चा की।
‘कर्नाटक से मिली सीख साबित होगी फायदेमंद’
तिर्की ने कहा कि कर्नाटक ने कृषि, पशुपालन, डेयरी क्षेत्र और सहकारिता के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। ऐसे सफल मॉडलों को अपनाने में दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और अनुभवों का आदान-प्रदान झारखंड के किसानों, पशुपालकों और सहकारी संस्थाओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि झारखंड और कर्नाटक के बीच ज्ञान, तकनीक और अनुभव का आदान-प्रदान किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार झारखंड के किसानों और पशुपालकों के लाभ के लिए विभिन्न राज्यों की सफल पहलों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
