सत्तापक्ष ने की MMDR संशोधन बिल को लेकर विशेष सत्र बुलाने की मांग

बीजेपी ने कहा- कानून का अध्ययन करें महागठबंधन के नेता

 

रांची: झारखंड की राजनीति में इन दिनों दो मुद्दे सुर्खियों में छाया हुआ है. एक तरफ भाजपा और उनके सहयोगी दल JPSC-JSSC सीजीएल में गड़बड़ी और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार को घेरने में लगी है तो दूसरी तरफ महागठबंधन में शामिल दल झामुमो, कांग्रेस, राजद और सीपीआई माले ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026’ को लेकर विपक्ष पर आक्रामक है.

महागठबंधन ने मांग की है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मामले पर चर्चा करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं और राज्य की जनता को बताएं कि यह नया कानून झारखंड और राज्य के हर निवासी को नुकसान पहुंचाएगा. सत्ताधारी दलों के नेताओं का कहना है कि सरना धर्म कोड और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर जैसे पूर्व में विधानसभा से प्रस्ताव पारित किया गया है, उसी तरह खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक जो अब कानून का रूप ले चुका है, उसे वापस लेने का प्रस्ताव झारखंड विधानसभा से पारित कराकर एक बड़ा संदेश दिया जाए.

विशेष सत्र को लेकर लिया जा सकता है निर्णय- झामुमो

झामुमो के केंद्रीय समिति सदस्य और प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले भी कह चुके हैं कि जरूरत पड़ी तो विशेष सत्र भी बुलाएंगे. उन्होंने कहा कि जब खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर विशेष सत्र बुलाई जाएगी तो सदन में चर्चा और विमर्श होगा, तथ्यों के साथ हम राज्य की जनता को बताएंगे कि कैसे सर्वोच्च न्यायालय के संविधान पीठ के फैसले को केंद्र की मोदी सरकार ने अपने उद्योगपति मित्रों को फायदे पहुंचाने के लिए संशोधन कर नया कानून बनाया.

मुख्यमंत्री झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं- कांग्रेस

झारखंड कांग्रेस ने भी खान एवं खनिज संशोधन विधेयक को वापस लेने के लिए झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है. कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस काले कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया जाए.

राकेश सिन्हा ने कहा कि खनन और खनिज कानून में किए गए संशोधन का मुद्दा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की अस्मिता का मुद्दा है. कांग्रेस नेता ने कहा “जमीन हमारी और टैक्स दिल्ली तय करेगी”. यह झारखंड के साढ़े तीन करोड़ लोगों के विकास का मुद्दा है. कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि राज्य में महागठबंधन सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं के अस्तित्व को लेकर है.

महागठबंधन के नेता का बयान

महागठबंधन के नेता कहते हैं कि खान-खनिज कानून में संशोधन से झारखंड को 15000 करोड़ का नुकसान होगा. ऐसे में राज्य में जनकल्याण के लिए जो योजनाएं चल रही हैं, वह प्रभावित हो सकती हैं. जिन योजनाओं पर असर पड़ सकता है, उसमें मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, सर्वजन पेंशन योजना, मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना, गुरुजी स्टूडेंट्स क्रेडिट कार्ड योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, झारखंड कृषि ऋण एवं फसल राहत योजना, सीएम रोजगार योजना, मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शामिल हैं.

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