UGC, आरक्षण में बदलाव और… अब जंतर-मंतर पर क्यों जुटे थे हजारों सवर्ण, हैं तीन मांग

UGC, आरक्षण में बदलाव और… अब जंतर-मंतर पर क्यों जुटे थे हजारों सवर्ण, हैं तीन मांग

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में जनरल कैटेगरी के लोगों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि सरकारी सहायता देने का आधार जाति नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति होनी चाहिए. प्रदर्शनकारियों ने UGC के इक्विटी रेगुलेशंस का भी विरोध किया.

जंतर-मंतर पर आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ शनिवार को यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रेस वार्ता की. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की केंद्रीय नेतृत्व के साथ मुलाकात कराई जाएगी और इस संबंध में बैठक कराने का आश्वासन दिया गया है. जंतर-मंतर पर चल रहे धरना-प्रदर्शन को लेकर मंत्री ने प्रदर्शनकारियों के प्रति सांत्वना और संवेदना भी जताई. इस दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक हर्ष दुबे के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं.

इससे पहले शुक्रवार को नारे, तख्तियां और झंडे लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों को शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए सरकारी सहायता उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर मिलनी चाहिए, न कि जाति के आधार पर. प्रदर्शन के दौरान ‘जाति के लिए नहीं, गरीबों के लिए आरक्षण’ जैसे नारे लगाए गए.

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प्रदर्शनकारियों ने SC/ST एक्ट अधिनियम का भी विरोध किया और इसे रद्द करने की मांग की. उनका तर्क था कि इसका लाभ हमेशा समाज के सबसे वंचित वर्गों तक नहीं पहुंचता और इसका किसी व्यक्ति के खिलाफ दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. उन्होंने इस संबंध में सरकार से जरूरी कदम उठाने की मांग की.

इन बातों को लेकर मांग

कई प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रावधान लागू करने और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ी नीतियों में बदलाव की मांग की. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता से वंचित करने की बात नहीं की जा रही है, बल्कि स्कॉलरशिप, फीस सहायता और कोचिंग जैसी सुविधाएं जरूरतमंद लोगों को मिलनी चाहिए.

आरक्षण को लेकर भी सवाल

कुछ लोगों ने आरक्षण व्यवस्था लागू होने के दशकों बाद भी इसके जारी रहने पर सवाल उठाए और मौजूदा सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इसकी समीक्षा की मांग की. प्रदर्शन ‘रिजर्वेशन रिफॉर्म आंदोलन’ के तहत आयोजित किया गया था, जिसका नेतृत्व NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे कर रहे थे. राजस्थान की जनरल सेना और चाणक्य सेना के साथ ही करणी सेना भी प्रदर्शन में शामिल हुई.

हिंसा के लिए नहीं

जंतर-मंतर पर बैरिकेडिंग के साथ पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की भारी तैनाती रही. आरक्षण और UGC इक्विटी रेगुलेशंस के मुद्दे पर मुखर रहे इन्फ्लुएंसर अजीत भारती भी प्रदर्शन में मौजूद थे. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और वे अपनी मांगों को रखने के लिए एकत्र हुए हैं, हिंसा करने के लिए नहीं.

दिन के अंत में दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर वायरल हुए. पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के प्रदर्शन, आंदोलन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई थी. हालांकि, रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक अधिकतम 500 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए NOC जारी किया गया था.

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