कौन थे जयपाल सिंह मुंडा? जिनके नाम पर रांची में बना स्टेडियम, JPSC-JSSC छात्रों के आंदोलन से चर्चा में आया


रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (Jharkhand Public Service Commission/ JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (Jharkhand Staff Selection Commission/JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। राज्य की हेमंत सरकार और जेपीएससी-जेएसएससी के प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच बातचीत भी हुई। हालांकि कुछ मांगों के चलते छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। शनिवार को छात्रों के आंदोलन का 15वां दिन है। JPSC और JSSC के अभ्यर्थी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डेरा जमाए हुए हैं। इस छात्र आंदोलन से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम चर्चा में आ गया है। क्या आप जानते हैं जिनके नाम पर स्टेडियम बना है, वो जयपाल सिंह मुंडा कौन हैं? आइए जानते हैं…

जयपाल सिंह मुंडा कौन हैं?

जयपाल सिंह मुंडा का जन्म खूंटी जिले में आदिवासी परिवार में 1903 में हुआ था। जयपाल की शुरुआती पढ़ाई रांची में हुई। पढ़ाई और हॉकी खेलने में जयपाल सिंह काफी तेज थे। उनकी प्रतिभा को देखते हुए मिशनरीज ने आगे की पढ़ाई के लिए उनकी मदद की और इंग्लेंड भेजा। वहां ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के के सेंट जॉन्स कॉलेज में पढ़ाई की। वहां से जयपाल सिंह मुंडा ने अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।

‘ऑक्सफोर्ड ब्लू’ सम्मान पाने वाले पहले भारतीय छात्र

हॉली खेलने में माहिर जयपाल सिंह मुंडा ने अपनी प्रतिभा यूनिवर्सिटी में होने वाले मैचों में भी दिखाई। जयपाल सिंह मुंडा डीप डिफेंडर के तौर पर खेलते थे। उनकी खासियत थी कि वो बिना फाउल किए ठीक समय पर विरोधी प्लेयर को रोकते हुए गेंद को अपनी हॉकी के कब्जे में कर लेते थे। और फिर जोरदार हिट से अपने टीम को साथी तक गेंद पहुंचा देते थे। यूनिवर्सिटी की हॉकी टीम में खेलते हुए उन्होंने कई मैच में टीम की जीत में अहम योगदान दिया। इसी वजह से उन्हें यूनिवर्सीट ने हॉकी में ‘ऑक्सफोर्ड ब्लू’ सम्मान से नवाजा।जयपाल सिंह मुंडा ये सम्मान पाने वाले पहले भारतीय छात्र थे।

भारतीय हॉकी टीम को पहला गोल्ड दिलाने वाले कप्तान

जयपाल सिंह मुंडा के नाम भारतीय हॉकी टीम को पहला गोल्ड मैडल दिलाने का भी रिकॉर्ड है। उन्होंने 1928 में एम्स्टर्डम समर ओलंपिक्स में भारतीय हॉकी टीम की कप्तान करते हुए टीम को स्वर्ण पदक दिलाया था। उनकी पहचान एक राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, संपादक, शिक्षाविद् के रूप में है।

आदिवासियों के लिए उठाई आवाज, बनाई झारखंड पार्टी

1938 में रांची-पटना का दौरा करने के दौरान आदिवासियों का हालत देखी तो उन्होंने ‘आदिवासी महासभा’ की स्थापना कर उनकी आवाज उठाने लगे। बाद में 1950 में जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासी महासभा को ‘झारखंड पार्टी’ में बदल दिया।

लगातार चार बार सांसद बने थे जयपाल सिंह मुंडा

1951 में लोकसभा चुनाव में रांची पश्चिम सीट ले लगा और जीत दर्ज की। वो लगातार चार बार लोकसभा के लिए चुने गए। तीन बार अपनी पार्टी से और एक बार कांग्रेस से। दरअसल 1963 में जयपाल सिंह ने अपनी झारखंड पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था। तब वो झारखंड पार्टी के ही सांसद थे। इसके बाद हुए 1967 के चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें खूंटी से उतारा था। इस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। जयपाल सिंह मुंडा 1951 से 1967 तक सांसद चुने गए।

जयपाल सिंह के योगदान को देखते हुए रांची में बने स्टेडियम को उनका नाम दिया गया। हालांकि ये स्टेडियम पहले एक तालाब हुआ करता था। जयपाल सिंह मुंडा के बेटे जयंत जयपाल मुंडा ने बताया कि आज जहां स्टेडिम है। वहां पहले तालाब था। जिसका कोई इस्तेमाल नहीं था। वहां स्कूल के बच्चों ने श्रमदान करके खेलने के लिए तैयार किया। बाद में धीरे-धीरे यहां लोगों की भीड़ जुड़ने लगी। फिर यहां स्टेडियम बन गया। जहां आज जेपीएससी-जेएसएससी के छात्र अपना आंदोलन कर रहे हैं।

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