महिला सशक्तिकरण या सिर्फ नारा? 20 साल से आवंटित प्लॉट पर दखल का इंतजार, राजस्व मंत्री के निर्देश से जगी उम्मीद

जमशेदपुर : आदित्यपुर आरआईटी थाना क्षेत्र के आसंगी-वर्गीडीह में लंबे समय से चल रहे भू-विवाद के समाधान के लिए राजस्व मंत्री ने जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जियाडा को विद्यालय और खेल मैदान के लिए बताई जा रही करीब डेढ़ एकड़ जमीन की मापी कर उसे अलग करने तथा इसके बाद विस्थापित परिवारों को आवंटित जमीन पर दखल दिलाने को कहा गया है।
इस विवाद में महिला उद्यमी ऊषा झा का औद्योगिक भूखंड भी प्रभावित बताया जा रहा है। करीब 20 वर्ष पहले तत्कालीन आयडा द्वारा नियमानुसार भूखंड आवंटित किए जाने के बावजूद उन्हें अब तक दखल नहीं मिल सका है।
ऊषा झा का आरोप है कि जब भी वह अपने भूखंड पर दखल लेने पहुंचीं, कुछ लोगों ने संगठित होकर विरोध किया और उन्हें वहां से हटाया। उन्होंने एक प्रभावशाली सफेदपोश व्यक्ति पर भी आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, उसके प्रभाव में लोग विरोध करते हैं तथा भूखंड पर निर्माण-संबंधी गतिविधियां और मिट्टी उठाव तक किया जा रहा है।
मामले में विरोध करने वाले बताए जा रहे 8-9 लोगों को अनुमंडल पदाधिकारी ने नोटिस देकर उनका पक्ष सुना। ऊषा झा के अनुसार, सुनवाई में उनके दावों में ठोस आधार नहीं मिला। इसके बावजूद उन्हें दखल नहीं मिलना प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।
अब राजस्व मंत्री के निर्देश के बाद मापी, सीमांकन और वैध आवंटन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इससे ऊषा झा के वर्षों पुराने मामले का भी समाधान संभव हो सकता है।
सवाल यही है—
जब महिला उद्यमिता और सशक्तिकरण की बात लगातार होती है, तो एक महिला को अपने वैध रूप से आवंटित भूखंड पर दखल दिलाने में दो दशक क्यों लग गए?
अब देखना है कि मंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन महिला उद्यमी को उसके अधिकार का वास्तविक लाभ कब दिलाता है?

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