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टाटा मोटर्स लखनऊ में प्लांट में 10 लाख गाड़ियां बन चुकी हैं। बुधवार को सीएम योगी ने 10 लाखवीं गाड़ी (ई-बस) को हरी झंडी दिखाई। उसमें बैठे भी। इस दौरान टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने उन्हें गाड़ी की खासियत बताईं।
सीएम ने कहा-
10 लाखवें वाहन का उत्पादन सिर्फ एक औद्योगिक उपलब्धि नहीं, ऐतिहासिक उड़ान का लॉन्च पैड है। यह उस नए यूपी का प्रतीक है, जो देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा। मैं विश्वास के साथ कहता हूं कि यह उड़ान रुकने वाली नहीं, बल्कि और अधिक ऊंचाइयां छुएगी।
वहीं, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा- आज हम सब यहां 10 लाखवें वाहन के साक्षी बने हैं। यहां कॉमर्शियल व्हीकल का उत्पादन किया जाता है। सप्लायर, पार्टनर और कम्युनिटी का एक मजबूत इकोसिस्टम है। हम अगले 5 साल में 20 लाख व्हीकल बनाएंगे।
10 लाखवीं गाड़ी चिनहट स्थित देवा रोड प्लांट में बनी है। यह प्लांट 1992 में लखनऊ में स्थापित किया गया था। इससे करीब 8 हजार लोगों को रोजगार मिला है। यहां से 15 देशों में टाटा की गाड़ियां एक्सपोर्ट होती हैं।
बचपन से टाटा के वाहनों को जिंदगी का हिस्सा बनते देखा
हम सभी ने बचपन से टाटा मोटर्स के वाहनों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनते देखा है। चाहे वह बसों में यात्रा हों या ट्रकों के जरिए देशभर में सामान पहुंचाना। समाज की अंतिम जरूरतों को पूरा करने में टाटा समूह हमेशा अग्रणी रहा है। आज भी टाटा का नाम विश्वास, गुणवत्ता और भरोसे का प्रतीक है।
लोग मानते हैं कि ‘टाटा’ का मतलब है- भरोसा। यह भरोसा उनकी मजबूत लीडरशिप, संस्थापकों के मूल्यों और लाखों कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। यही वजह है कि भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में टाटा के उत्पादों के प्रति विश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।
