तरबूज निर्दोष निकला! लेकिन मौतों की खबर के बाद दाम गिरे, बाजार पड़े सूने


मुंबई:

पिछले कुछ दिनों से मायानगरी में “कातिल तरबूज” को लेकर मचे कोहराम के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. पायधुनी के डोकडिया परिवार में हुई संदिग्ध मौतों के मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन FDA ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है. जिस तरबूज पर मौत बांटने का आरोप लग रहा था, वह जांच में पूरी तरह “निर्दोष” पाया गया है. दरअसल मुंबई के पायधुनी इलाके में 26 अप्रैल 40 साल के अब्दुल्ला डोकाडिया को अस्पताल में भर्ती कराया गया. उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि तरबूज खाने के बाद उनकी, उनकी पत्नी नसरीन (35) और दोनों बेटियों आयशा (16) और जैनब (13) की तबीयत अचानक बिगड़ गई. देखते ही देखते हालत इतनी खराब हो गई कि चारों की जान चली गई. इसके बाद तरबूज में खतरनाक केमिकल मिलाए जाने की चर्चा चलने लगी.

 

तरबूज पर मचा था भारी बवाल, दहशत में थी मुंबई!

मुंबई के पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के सदस्यों की अचानक तबीयत बिगड़ने और मौतों के बाद शक की सुई घर में आए तरबूज की तरफ घूमी थी. सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक यह चर्चा फैल गई कि तरबूज को मीठा और लाल बनाने के लिए उसमें जहरीले केमिकल और रंगों का इंजेक्शन लगाया जा रहा है. इस डर का असर ऐसा हुआ कि पूरी मुंबई में तरबूज की बिक्री धड़ाम हो गई. लोग इस फल को हाथ लगाने से भी डरने लगे थे.

नवी मुंबई की सबसे बड़ी मंडी में तरबूज की कीमतें गिरी

नवी मुंबई स्थित एशिया की सबसे बड़ी सब्ज़ी-फल मंडी, APMC वाशी में तरबूज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, मंडी में तरबूज के दाम 7 रुपये प्रति किलो तक कम हो गए हैं. वहीं, दक्षिण मुंबई के जिस नल बाजार से पीड़ित परिवार ने तरबूज खरीदा था, वहां तो हालात और भी खराब दिखे. दहशत के चलते ग्राहकों ने दूरी बना ली और नल बाजार में तरबूज बिकना ही बंद हो गए.

 

FDA की रिपोर्ट: न रंग मिला, न जहर

FDA की जांच रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि तरबूज में किसी भी तरह की मिलावट नहीं थी. जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि तरबूज को अधिक लाल दिखाने के लिए किसी भी आर्टिफिशियल कलर या उसे बड़ा और मीठा बनाने के लिए खतरनाक रसायनों Chemicals का इस्तेमाल नहीं किया गया था. केवल तरबूज ही नहीं, बल्कि डोकडिया परिवार के घर से जब्त किए गए अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों में भी अब तक कोई मिलावट नहीं पाई गई है. हालांकि, FDA ने यह भी माना है कि उनके पास टेस्टिंग के लिए तरबूज के नमूनों की संख्या काफी कम थी.

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