चेन्नई: उत्तर भारत के राज्यों में नवरात्रि और दुर्गा पूजा का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां पूजा पंडालों में लाउडस्पीकर पर बजने वाले फिल्मी गानों और उन पर होने वाले डांस ने एक नया और चिंताजनक ट्रेंड सेट कर दिया है. जहां एक तरफ लोग इस शोर और सांस्कृतिक गिरावट से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ इस गंभीर मुद्दे पर तमिलनाडु हाई कोर्ट ने बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि अगर नवरात्रि उत्सव के दौरान लोग फिल्मी गानों पर डांस करते हैं, तो उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए.
भारत हिंदू मुन्नानी के राज्य सचिव के. डिल्ली बाबू ने मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने कहा था, “नवरात्रि के त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के उत्सव और पूजा के त्योहार के रूप में देखा जाता है. नवरात्रि के इस पावन पर्व के दौरान, गीतों और नृत्य संगीत के माध्यम से तीन महान देवियों की कहानियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाता है. लेकिन अब, सांस्कृतिक गिरावट के कारण, पैसे कमाने के उद्देश्य से चेन्नई के निजी होटलों में नवरात्रि पूजा मनाई जा रही है. विशेष रूप से चेन्नई के रॉयपेट्टाह में एक्सप्रेस एवेन्यू मॉल में, पिछले साल गुजरात की एक कंपनी ने दुर्गा देवी की मूर्ति रखकर फिल्मी गानों पर डांस प्रोग्राम आयोजित किए थे.”
याचिका में आगे कहा गया- “इसके बाद, उस कंपनी को इस साल भी फिल्मी गानों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दे दी गई है. इस नवरात्रि उत्सव के दौरान अंग्रेजी हिप-हॉप गाने और बॉलीवुड के धमाकेदार गाने बजाए जा रहे हैं. साथ ही, इस कार्यक्रम में आने वाले युवा अपने साथ शराब लेकर आते हैं, जिससे वहां आने वाले दूसरे लोगों को परेशानी हो रही है और इससे धर्म की पवित्रता भी प्रभावित हो रही है.”
याचिका में पुलिस पर इस कार्यक्रम को लेकर पहले से ही एहतियाती कदम उठाने की बात कही गयी. याचिका में कहा गया- “अगर यह कार्यक्रम हिंदू धर्म के खिलाफ आयोजित किया जाता है, तो इसकी अनुमति रद्द की जानी चाहिए. इससे पहले, इस संबंध में 12 अक्टूबर को तमिलनाडु सरकार और पुलिस को एक याचिका सौंपी गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है.”
जब यह मामला मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस वी. लक्ष्मी नारायणन के सामने सुनवाई के लिए आया, तो याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रिचर्डसन विल्सन ने दलील दी कि हालांकि गरबा और डांडिया नृत्य नवरात्रि के उत्सव का हिस्सा हैं, लेकिन जिस तरह के गाने बजाए जा रहे हैं और शराब परोसी जा रही है, उसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. कहा गया कि, पुलिस द्वारा दी गई अनुमति को रद्द किया जाना चाहिए.
दलीलें सुनने के बाद, जज ने कहा कि नवरात्रि उत्सव के दौरान फिल्मी गानों पर डांस करना सही नहीं है. उन्होंने आदेश दिया कि नवरात्रि त्योहार के लिए दी गई अनुमति में पुलिस द्वारा तय की गई शर्तों का यदि कोई भी उल्लंघन पाया जाता है, तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करे. इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को बंद कर दिया.
