दीपके ने गले में बांध ली खतरे की घंटी,जो नहीं करना था, वही कर गए

शर्तों का पालन करना अब दीपके के लिए मजबूरी बन जाएगा

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तिरंगा मार्च के शुरू होते ही हिरासत में लिए गए अभिजीत दीपके को शनिवार शाम को कोर्ट से जमानत मिलने पर रिहा कर दिया गया। दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, लेकिन कुछ शर्तें लगा दीं। इन शर्तों का पालन करना अब दीपके के लिए मजबूरी बन जाएगा। इतना ही नहीं, दीपके ने वह गलती कर दी, जो सीजेपी के हिसाब से भविष्य के प्रोटेस्ट के लिए उन्हें नहीं करनी चाहिए थी। दरअसल, दीपके को पीस बॉन्ड पर भी साइन करवाया गया है। इसे साइन करके एक तरह से दीपके ने अपने गले में खतरे की घंटी बांध ली है। अगर इस बॉन्ड का उल्लंघन होता है तो पुलिस दीपके पर कार्रवाई कर सकती है। इससे उनके भविष्य में जेल जाने का खतरा बना रहेगा।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ”शांति बॉन्ड में दिए गए आश्वासन के आधार पर दीपके को छोड़ दिया गया है। लिखित आदेश का हम लोग इंतजार कर रहे हैं।” जैसे ही लिखित आदेश आया, दीपके को रिहा कर दिया गया और वे फिर से उस घर में पहुंच गए, जो दिल्ली में उनका ठिकाना है। शांति बॉन्ड पर साइन करने की वजह से दीपके को अब भविष्य में वो सभी शर्तें माननी होंगी, जो उसमें लिखी होंगी।

जेल में हैं सीजेपी के दो बड़े नेता दास और रांका

शुक्रवार को कनॉट प्लेस में कॉजपा के ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली के झंडेवालान स्थित घर से बाहर निकलते ही अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया गया था। दीपके से पहले सीजेपी के दो बड़े नेता आशुतोष रांका और सौरभ दास पर पुलिस पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। दोनों ने पहले पीस बॉन्ड साइन किया था, और बाद में उन्होंने जंतर-मंतर का गेट फांदकर तिरंगा लहराया। दोनों को पहले हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया गया। रांका और दास को कोर्ट ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। दोनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में जो बॉन्ड उन्होंने पहले साइन किया था, उसके उल्लंघन की भी धाराएं लगी हैं।

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