माल महाराज का मिर्जा खेले होली …. SBI को चूना, नीलामी से DRT असंतुष्ट, मांगा सम्पति का वैल्यूएशन रिपोर्ट

Jamshedpur: SBI Vrs Pato Builders- भारतीय स्टेट बैंक ने 10 करोड़ के एक एन पी ए लोन की वसूली के क्रम में सरफेसी नियम के तहत करोड़ों के बाजार भाव वाली बेशकीमती जमीन औने पौने दाम में नीलम करने की जो कार्रवायी की  वह उसके लिए गले की फांस  बनने जा रही है। आदित्यपुर स्थित पाटो बिल्डर लिमिटेड के लोन रिकवरी के एक मामले में स्टेट बैंक , एस ए एम बी, पटना शाखा ने लोन के एवज में गिरवी जमीन की  बिक्री जिस ढंग से दिखाई है उस पर डी आर टी , रांची ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए ऐसा आदेश जारी किया है जिस पर स्टेट बैंक को कुछ कहते नहीं बन रहा।  पता चलता   है कि यह सब मामला लोन रिकवरी के क्रम में बिक्री पर रखी गई उक्त गिरवी  जमीन एक खास समूह को   नाजायज लाभ दिलाने के लिए बाजार भाव से बहुत कम मात्र 87 लाख रुपये में बेच दी गयी, जबकि आज उसका बाजार भाव करोड़ों में हो गया है और ईमानदारी से इसकी बिक्री की गई होती तो उक्त डूबे बैंक लोन का बहुत बड़ा हिस्सा इस बिक्री से सधा लिया गया होता। बैंक और कर्ज़दार पाटो बिल्डर्स दोनों विजयी स्थिति  में होते।आज इस भूमि पर विशालकाय अपार्टमेंट बना हुआ है, लेकिन ज़मीन की बेस प्राइस काफी कम  निर्धारित की गई  । इसमें कथित रूप से नीलामी के खरीदार ने धोखा किया जिसमें स्टेट बैंक के अधिकारी जाने – अनजाने फंस गए और  बैंक सहित जमीन के मालिक मुकेश कुमार भगत,पाटो बिल्डर्स को ही नही बैंक को भी जबरदस्त नुकसान पहुंचाया गया।जमीन की पूरी कीमत बाजार भाव के अनुसार नहीं  वसूलने का यह खेल अब  डी आर टी के आदेश के बाद स्टेट बैंक के  गले की फांस बनने वाली   है।

इस संबंध में डेब्ट्स रिकवरी ट्रार्ई्ब्यूनल( DRT ) ,रांची ने   पाटो बिल्डर्स लिमिटेड के आवेदन पर गत 1 फरवरी को उक्त आदेश जारी किया ।  पाटो बिल्डर्स के अधिवक्ता ए के रशीदी ने बताया कि  डीआरटी ने  अपने आदेश में एक लोकल कमिश्नर की नियुक्ति की जो एक चार्टर्ड वेलुअर  के साथ स्थल पर जाकर प्रश्नगत संपत्ति  की वास्तविकता और उसके वैल्यूएशन की गणना करेंगे .इस बीच सभी संबंधित पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया  है. डीआरटी ने रांची के आर आर सहाय को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया और उन्हें इस आदेश का अनुपालन करने और उक्त संपत्ति की वस्तु स्थिति की रिपोर्ट देने को कहा है .उनको एक सरकारी पैनल वाले सुयोग्य वैल्यूअर को  साथ  रखने को कहा गया है जो पूरी संपत्ति की कीमत की गणना करेंगे.  डी आर टी ने इस सरकारी पैनल वाले वैल्यूर के चयन की जिम्मेवारी पाटो बिल्डर्स के अधिवक्ता श्री रशीदी को सौंपी है। स्टेट बैंक ने डी आर टी के समक्ष चली सुनवाई के दौरान कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

 यह मामला SBI , SAMB Branch , Patna के अधिकृत पदाधिकारी द्वारा 31 दिसंबर 2019 को निकाली गई बिक्री सूचना से संबंधित है जो पाटो बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड पर बकाया एक लोन अमाउंट की रिकवरी के लिए प्रकाशित की गई थी. यह पूरा खेल सेल डीड नंबर 4292 / दिनांक 23 अगस्त 2005 तथा सेल डीड नंबर 4252/ दिनांक 17 अगस्त 2005 के बीच खेला गया दिखता है। पाटो बिल्डर्स के  लोन के  बाबत बैंक में  सेल डीड संख्या 4292 वाली जमीन जमानती रखी गई थी जबकि  सेल डीड नंबर 4252/ दिनांक 17 अगस्त 2005 वाली कथित जमीन और इसके स्वामी का उक्त लोन से दूर-दूर का कोई संबंध नहीं है .बैंक में सेल डीड नंबर 4252 /दिनांक 17 अगस्त 2005 की बिक्री दर्शा दी है जो कभी बैंक में गिरवी ही नही रखी गयी और इसके मालिक का पाटो बिल्डर्स के लोन से कोई संबंध भी नहीं था।
दरअसल पता चला है कि गिरवी रखी गई सेल डीड 4292 वाली जमीन के स्वामी मुकेश कुमार भगत हैं और वे पाटो बिल्डर्स के भी मालिक हैं. और इस सेल डीड 4292 वाले भूखंड पर आदित्यपुर धीराजगंज स्थित Rameshwaram आवासीय परिसर का एक भाग निर्मित हुआ है. पूर्व में रामेश्वरम् के प्रमोटर और मुकेश कुमार के बीच एक एकरारनामा के अनुसार रामेश्वरम् को डेवलप किया गया ,लेकिन कालक्रम में रामेश्वरम् के प्रमोटर नेे मुकेश कुमार भगत के साथ धोखा करते हुए पाटो बिल्डर्स लिमिटेड के लोन रिकवरी मामले में बैंक को आगे कर जमीन हथियाने की कोशिश की है जिसके बाबत लोन रिकवरी सेल नोटिस में उसने सारा प्रपंच रचते हुए काफी कम कीमत पर बैक बिक्री  सूचना के मौके का नाजायज लाभ उठाया. मुकेश कुमार भगत द्वारा बैंक को इस संबंध में बार-बार आगाह भी किया गया लेकिन बैंक ने  कथित रूप से कोई सुनवाई नहीं की .सेल डीड 4292 वाली जमीन और उस पर निर्माण की बाजार कीमत जहां करोड़ों रुपए में होती वहीं इस मामले में बहुत कम कुछ लाख रुपयों  में उसको बिक्री कर दी गई और कागजात में झांसा देते हुए गलत सेल डीड नंबर 4252 का उल्लेख किया गया जिसका रजिस्टर 2 में वेंडर किस्टों महतो, ग्राम खूंटी टोला पाहादोहर ,थाना चांडिल और खरीदार सोनारी के सुधीर अग्रवाल तथा साकची के नीतीन बिहारी श्रीवास्तव बताए जाते हैं जिनका पाटो बिल्डर्स के लोन रिकवरी से कहीं कोई संबंध नहीं था ,न हीं यह  जमीन गिरवी रखी गई थी.

डीआरटी के आदेश पर अब लोकल कमिश्नर और सरकारी पैनल वाले बैल्यूअर की जमीन की वास्तविक तथा प्रश्नगत  जमीन पर अवस्थित रामेश्वरम् वाली संपत्ति की कीमत की गणना कर रिपोर्ट देंगे. इसमें सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन को भी सहयोग करना होगा.लोकल कमिश्नर  गम्हरिया अंचल कार्यालय , रजिस्ट्री कार्यालय ,आदि से भी सत्यता जांच करेंगे ताकि पूरा मामला साफ हो सके। रामेश्वरम के प्रोमोटरों और स्टेट बैंक को इसका जवाब देना होगा कि बाजार कीमत की तुलना में सेल के लिए बेस प्राइस इतनी कम किन परिस्थितियों में निर्धारित की गई और बिना गिरवी जमीन की बिक्री कैसे दिखाई गई।

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