एक करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा का क़रीबी नक्सली नरहरी उर्फ विश्वनाथ ने पत्नी के साथ किया सरेंडर

 

मनोहरपुर संवाददाता: झारखंड में नक्सलियों को एक बड़ा झटका लगा है। एक करोड़ रुपये के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा का करीबी एवं विश्वसनीय सहयोगी माने जाने वाले 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली विश्वनाथ उर्फ सिलाई उर्फ संतोष उर्फ डोंगा उर्फ गंगाधर उर्फ पसुनुरी नरहरी ने मंगलवार को तेलंगाना में अपनी पत्नी जोबा उर्फ पूनम उर्फ भवानी उर्फ सुजाता के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।

नक्सली संगठन में पूनम रीजनल कमिटी सदस्य थी, जबकि विश्वनाथ उर्फ नरहरी सब-जोनल एरिया कमिटी सदस्य के पद पर कार्यरत था। हाल के दिनों में पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा द्वारा उसे सेंट्रल कमिटी मेंबर बनाया गया था। सूत्रों के अनुसार नरहरी को मिसिर बेसरा का सबसे करीबी साथी और रणनीतिक सहयोगी माना जाता था।

विश्वनाथ उर्फ नरहरी संगठन के टेक्निकल विंग का प्रमुख था और सैन्य अभियानों में भी माहिर माना जाता था। वह तेलंगाना राज्य के हनमकोंडा जिले के काजीपेट मंडल स्थित सोमिडी गांव का निवासी है। वर्ष 1996 से वह भूमिगत रहकर संगठन के विभिन्न पदों पर सक्रिय था।

नरहरी पश्चिमी सिंहभूम के कोल्हान क्षेत्र में नक्सलियों के मुख्यालय माने जाने वाले सारजामबुरु एवं सारंडा जंगलों में कई वर्षों तक सक्रिय रहा। उसका मुख्य कार्य विभिन्न जोन एवं जंगलों में सक्रिय नक्सली दस्तों के बीच संपर्क बनाए रखना था। इसके अलावा वह संगठन के दस्तावेज, रणनीति, पर्चे, पोस्टर, बैनर, वीडियो एवं ऑडियो संदेश तैयार करने और उन्हें सुरक्षित रखने का कार्य भी करता था।

बताया जाता है कि सारंडा और कोल्हान के जंगलों में रहकर उसने मिसिर बेसरा के साथ संगठन के लिए कई अहम रणनीतियां तैयार की थीं। लेकिन सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों से नक्सली संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते दबाव और नुकसान को देखते हुए विश्वनाथ उर्फ नरहरी ने अपनी पत्नी पूनम उर्फ जोबा के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर सरेंडर कर दिया।

इस घटना से यह साफ संकेत मिल रहा है कि झारखंड में नक्सली संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है। मिसिर बेसरा का करीबी और भरोसेमंद साथी मुख्यधारा में लौट चुका है, ऐसे में इसका संगठन पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

फिलहाल पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अपने 35 से 40 सदस्यों के साथ कोल्हान और सारंडा के जंगलों में लगातार ठिकाना बदलते हुए छिपता फिर रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि उसके अन्य करीबी सदस्य भी सरेंडर की राह अपनाते हैं या फिर सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाते हैं।

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